ASP प्रदीप शेण्डे बेवजह लाठीचार्ज के दोषी: मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट | SIDHI MP NEWS

भोपाल। मध्यप्रदेश राज्य पुलिस सेवा के प्रदीप शेण्डे प्रदर्शनकारियों पर बेवजह लाठीचार्ज के दोषी पाए गए हैं। मामला मध्य प्रदेश के सीधी जिले का है। घटना अप्रैल 2018 में हुई थी। आरोप था कि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रदीप शेण्डे ने प्रदर्शनकारियों पर बेवजह लाठी चार्ज किया जबकि इसका उन्हें कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ था। इतना ही नहीं रापुसे के अधिकारी प्रदीप शेण्डे पर न्यायालय भवन में घुसकर वकीलों पर जो कि प्रदर्शन नहीं कर रहे थे, लाठी कार्य करने का आरोप था। मजिस्ट्रियल जांच में SPS अधिकारी प्रदीप शेण्डे दोषी पाए गए हैं। 

पुलिस से जान बचाने के लिए न्यायालय भवन में छुप गए थे युवक

उल्लेखनीय है कि 10 अप्रैल 2018 को भारत बंद आह्वान को लेकर कलेक्ट्रेट चौराहे में युवकों की भारी भीड़ जमा हुई थी। बाद में यही भीड़ पास के बीथिका प्रांगण में पहुंचकर नारेबाजी कर रही थी। आंदोलन को लेकर युवकों का समूह नारेबाजी करते हुए जब चौराहे की ओर पहुंचा तो भीड़ को तितर-बितर करने के बजाय मौके पर भारी संख्या में मौजूद पुलिस बल ने लाठीचार्ज कर दिया। लाठीचार्ज के दौरान भगदड़ मची तो अपनी जान बचाने युवक यहां-वहां भागते नजर आये। युवको के समूह में से कुछ युवक सुरक्षा के लिहाज से न्यायालय परिसर की ओर भी भाग गये थे जिनका पीछा करते हुये पुलिस वहां भी पहुंच गई और अंधाधुंध लाठीचार्ज करने लगी। 

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ वकीलों को भी बेरहमी से पीटा

इस दौरान वकीलों को भी बुरी तरह से पीटा गया। कईयों को तो इस तरह पीटा कि अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है। अधिवक्ता नंदलाल पाण्डेय को गंभीर चोंट आने के कारण रीवा अस्पताल के लिये रेफर किया गया था। लाठीचार्ज के विरोध में अधिवक्ताओं ने हफ्तों न्यायालय का बहिष्कार किया। प्रशासन, शासन को ज्ञापन सौंपा जहां मजिस्ट्रियल जांच का निदेश दिया गया था। 

एडिशनल एसपी प्रदीप शेण्डे ने अनाधिकृत रूप से लाठीचार्ज का आदेश दिया था

मजिस्ट्रियल जांच का जिम्मा उपखण्ड मजिस्ट्रेट आरके सिन्हा को सौंपी गई थी। करीब डेढ़ वर्ष बाद श्री सिन्हा ने 9 पेज की अपनी रिपोर्ट कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी को सौंपी है। इसकी प्रति जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अधिवक्ता संघ अध्यक्ष सचिव व पुलिस अधीक्षक सीधी को भेजी गई है। जांच रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि भीड़ पर लाठीचार्ज के लिये किसी राजस्व अधिकारी ने लिखित या मौखिक में आदेश नहीं दिया था। वहां मौजूद तत्कालीन अति. पुलिस अधीक्षक प्रदीप शेण्डे ने पुलिस अधिकारियों कर्मचारियों को लाठीचार्ज के लिये निर्देशित कर दिया था। 


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