भोपाल। खिलाड़ियों के लिए पौष्टिक भोजन अनिवार्य है। उन्हे कम से कम दूध, अंडे और फल तो मिलना ही चाहिए परंतु मध्य प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को पोहा-जलेबी और आलूबड़े खिला रही है। मामला राजधानी में चल रही राज्य स्तरीय शालेय तैराकी, वाॅटरपाेलाे, राेप स्किपिंग और फेंसिंग प्रतियोगिताओं का है।
पत्रकार कृष्ण कुमार पांडेय की रिपोर्ट के अनुसार राज्य स्तरीय शालेय प्रतियोगिताओं में बच्चाें काे खिलाड़ियों की स्पाेर्टी डाइट तो दूर, सामान्य डाइट भी नसीब नहीं हो रही है। टूर्नामेंट में आए चार अलग-अलग खेलों के खिलाड़ियों से उन्हें मिल रही डाइट के बारे में जानकारी ली, तो चौंकाने वाली बात सामने आई। खिलाड़ियों ने बताया कि उन्हें नाश्ते में पोहा-जलेबी, आलू बड़ा, पकौड़े दिए जा रहे हैं। लंच और डिनर में भी ऐसे पोषक तत्व नहीं हैं जो खिलाड़ियों की मूलभूत जरूरत है। खाने से दूध-दही, पनीर, अंडा यानी प्रोटीन का सोर्स पूरी तरह गायब है।
खिलाड़ियों की हड्डियां कमजोर हो जाएंगी
न्यूट्रीश्निस्ट अमिता सिंह और एलएनआईपीई के न्यूट्रीशियन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर वीरेंद्र झाजरिया से हमने डाइट प्लान की समीक्षा कराई। इन दोनों ही विशेषज्ञों ने कहा- स्कूली खेलों का डाइट मेन्यू बिलो एवरेज है। इसमें कई पोषक तत्वों की कमी है। इससे मेडल जीतने के बजाय बच्चों की हड्डियां और कमजोर हो रही हैं। बढ़ती उम्र के बच्चों (12 से 20 साल) को अधिक पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है।
सरकारी बयान
केके द्विवेदी, संचालक लोक शिक्षण ने पत्रकार कृष्ण कुमार पांडेय से कहा कि मुझे आपसे ही इस संबंध में जानकारी मिली है। मैं संबंधित अधिकारी को निर्देशित करता हूं। यदि ऐसा हो रहा है तो जरूर कार्यवाही करेंगे।
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