श्रीमान, मैं आपके माध्यम से शिवपुरी कलेक्टर महोदय, शिक्षा मंत्री महोदय तथा शासन (डीईओ शिवपुरी को नहीं क्योंकि एक महाभ्रष्ट कर्मचारी उनके नजदीक नजर आता है) से निवेदन करना चाहता हूं कि शिवपुरी जिले के कोलारस ब्लॉक अंतर्गत एक में पदस्थ अकाउंटेंट भ्रष्टाचार की सभी सीमाएं लांघ चुके हैं, संकुल में अब ये आलम है कि कोई भी काम बिना रिश्वत के नहीं होता।
हालांकि यह अकाउंटेंट पूर्व से ही पूरे जिले में कुख्यात हैं। रिश्वत लेकर गुरुजियों को हुए लाखों रुपये के अवैध भुगतान घोटाला में भी इनका नाम था। विभागीय जांच भी चल रही है। इस संकुल के अंतर्गत लगभग 300 कर्मचारी कार्यरत हैं जिनसे ये सभी तरह की अवैध वसूली करते हैं। पिछले मार्च माह में सभी कर्मचारियों से इनकम टैक्स के असेसमेंट फार्म के 300-300 रुपये लिए गए। इसके बाद अगस्त माह में फार्म 16 देने के लिये फिर 100-100 रुपये लिए गए। इसके उपरांत रिटर्न्स फ़ाइल करने के लिए भी 300-300 रुपये लिए गए (इसका सबूत ये है कि उन्होंने कोलारस के एक नेट कैफ़े से सारे रिटर्न्स फ़ाइल कराए। सारे आई.टी.आर. में एक ही आई.पी.एड्रेस है)।
अतिथि शिक्षकों की भर्ती के लिए हर अतिथि से 2000-5000 की रिश्वत ली गई। इसके अतिरिक्त उन्होंने संकुल के ही एक माध्यमिक विद्यालय में छात्र संख्या कम होने पर भी अपने सगे भतीजे की गणित के अतिथि शिक्षक पर अवैध नियुक्ति कर रखी है। संकुल के अंतर्गत आने वाले अध्यापकों के छठवें वेतनमान की दूसरी किस्त एवं पिछले दो मंहगाई भत्तों के एरियर का भुगतान भी अभी तक लटका कर रखा गया है जबकि कोलारस ब्लॉक के ही अन्य सभी संकुलों में उसका भुगतान किया जा चुका है। कारण एक ही है पहली किस्त के समय शिक्षकों ने उन्हें 10℅ कमीशन दे दिया था परंतु इस बार अभी तक ऐसा नहीं हो पाया है। इसके अतिरिक्त कुछ समय पूर्व वेतन भुगतान के लिए भी 200 रुपये वार्षिक देने की मांग की गई थी तथा कारण बताया गया था कि बिल जनरेट करने के लिए संकुल के पास कोई फण्ड नहीं होता तो बिलों का खर्चा कौन करेगा।
सबसे नया प्रकरण स्थानान्तरण वाले शिक्षकों का है, संकुल से लगभग 45 शिक्षकों का स्थांतरण अन्यत्र हुआ है और वे सभी रिलीव होकर दूसरी जगह जॉइन कर चुके है। शासन का ये नियम है कि यदि कर्मचारी 16 तारीख के बाद रिलीव होता है तो उसका उस माह का वेतन उसी संकुल से प्रदान किया जाता है परंतु अकाउंटेंट महोदय ने उन 45 लोगों के बिल ही जनरेट नहीं किये ताकि उनको वेतन ना मिल सके और वो गिड़गिड़ाते हुए इनके पास आये इसके अतिरिक्त ना ही उनकी एलपीसी जारी की है।
जब एक महिला शिक्षिका जो दूसरे जिले में स्थानांतरित हुई है ने उनसे एलपीसी जारी करने के लिए फ़ोन पर निवेदन किया तो उसे उन्होंने जबाब दिया कि आपके पूरे कागज लेकर आइये तभी एलपीसी जारी करूँगा, साथ ही एलपीसी डाक से ही भेजूंगा फिर चाहे वो कभी भी पहुंचे या पहुंचे ही नहीं। अब इन शिक्षकों को इस माह का वेतन मिलेगा नहीं और नया संकुल तब तक वेतन नहीं देगा जब तक एलपीसी उन्हें प्राप्त नहीं होती। अगर मिल कर रिश्वत दे जाओ तो सब हाथों-हाथ हो जाएगा।
उनकी संपत्ति की बात करें तो वे 12 लाख की nexa गाड़ी रखते है, कोलारस हाईवे पर खुद का होटल और 150 बीघा जमीन के मालिक हैं परंतु इनकम टैक्स डिपार्टमेंट या अन्य किसी विभाग को ये सब आज तक नहीं दिखा। संकुल प्राचार्य की बात करें तो वो प्रभारी है और अकाउंटेंट के हाथ में बंद है क्योंकि रसूख वाले अकाउंटेंट से बिगाड़ कर क्या मिलेगा जब थोड़ी मलाई उन्हें भी मिल सकती है।
अकाउंटेंट महोदय महीने में 7 दिन आफिस आ जाएं तो बहुत गनीमत है शिक्षकों को अपने काम के लिए उनके कोलारस स्थित भवन पर व्यक्तिगत मिलना पड़ता है। शिक्षक वर्ग उनके खिलाफ आवाज उठाता नहीं है कि कहीं वो उनकी सर्विस बुक में कुछ काला-पीला न कर दे, या वेतन ना रोक दे।
श्रीमान के माध्यम से निवेदन है कि अकाउंटेंट महोदय के काले कारनामों की जांच कराई जाए और या तो उनको 20/50 के नियम के तहत अनिवार्य सेवा निवृति दे दी जाए या उनका संकुल से ट्रांसफर कर दिया जाए और ऐसी जगह पदस्थ किया जाए जहां वो किसी कर्मचारी का खून ना चूस सके ताकि शिक्षकों को उनके अत्याचार से मुक्ति मिल सके।
धन्यवाद
कृपया नाम उजागर ना करें।
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