रहीम शेरानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:
झाबुआ जिले के मेघनगर में मंदिर समिति के सदस्यों ने शासकीय मामलों में अनुभावी अभिभाषक सलीम कादरी एवं जिया उल हक कादरी बंधुओं से न्याय को लेकर गुहार लगाई थी जिसमें कादरी बंधुओं ने अपने हुनर और अनुभव से निःस्वार्थ भाव से मंदिर समिति का पक्ष न्यायालय के समक्ष रखा। मुस्लिम समुदाय से होने के बाद भी कालिका माता मंदिर के लिये वाद की पेरवी करते हुए जीत दर्ज की जिसमें नगर के पत्रकारों का भी विशेष योगदान रहा जिससे प्रभावित हो कर मंदिर समिति के सदस्यों ने अपनी खुशी का इजहार करते हुए नगर के पत्रकारों की उपस्थिति में एडवोकेट सलीम कादरी,
जियाउल हक कादरी का सम्मान समारोह स्थानीय रामदल अखाड़े में रखा जिसमें सहभोज का भी आयोजन किया गया। आयोजन में पूर्व सरपंच पूर्षोतम प्रजापति ने अपनी बात रखते हुए फूलों की माला से कादरी बंधुओं का जोरदार स्वागत किया।

सम्मान समारोह के कार्यक्रम का संचालन भारतीय पत्रकार संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष निलेश भानपुरीया ने किया। इस मौके पर पत्रकार संघ के अध्यक्ष प्रकाश भंडारी, रहीम शेरानी, दशरथ सिंह कट्ठा, भूपेंद्र बरमडलिया, फारुख शेरानी, पंकज बडोला, अली असगर बोहरा, मनीष नाहाटा जैन, मनोज उपाध्याय, जाकिर शैख जयस झामर, आदी उपस्थित थे।

एडवोकेट सलीम कादरी ने पूरा मामले को विस्तार से बताया की नगर में गत 2 वर्षों से माननीय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व न्यायालय मेघनगर के शासकीय सर्वे क्रमांक 609/2 रकबा 0.130 हेक्टेयर की चरनोई भूमि जो कि वर्ष 1984 में भुवनेश पिता बंसीलाल शर्मा ने अपने राजनीतिक दबाव प्रभाव से राजस्व रिकार्ड में अपना नाम की टिप लगवाते हुए दूसरे वर्ष 1985 में उक्त भूमि का व्यवस्था में अपना नाम दर्ज करवा लिया गया जबकि मौके पर भूमि का आवंटन ही नहीं हुआ था वही शर्मा को भूमि का अधिकार भी नहीं दिया गया जिस कारण उक्त भूमि पर शर्मा अपना कब्जा कभी दर्शया ही नहीं पाया शर्मा की मृत्यु के बाद एक लंबे समय तक उक्त भूमि पर उसके परिवार द्वारा किसी ने अपना दावा प्रस्तुत भी नहीं किया परंतु वर्ष 2011 में भू-माफिया की गिद्ध दृष्टि शासकीय भूमि पर पड़ी तब इन्होंने षड्यंत्र पुर्वक उक्त भूमि को शर्मा की बेवा सुमन देवी के नाम नामांकन करवाया और तत्काल में वर्ष 2012 में भूमि को आनन-फानन में विक्रय करा कर वसीम के नाम करवा कर तत्काल में नामांतरण करवाते हुए उक्त शासकीय भूमि पर रात दिन निर्माण कार्य चालू कर दुकान व बाउंड्री वॉल बनाना शुरू कर दिया यहां यह उल्लेख है कि उक्त भूमि पर कई वर्षों पुराना कालका माताजी का मंदिर होकर आसपास की खुली शासकीय भूमि मंदिर के धार्मिक आयोजनों में सार्वजनिक उपयोग उपभोग के काम में आती थी उस पर हो रहे अवैध निर्माण को लेकर मंदिर के पुजारी कालू पिता मडीया डामोर उनके साथी बहादुर सिंह वसुनिया ने जिला कलेक्टर कार्यालय में जनसुनवाई में शिकायत आवेदन प्रस्तुत किया इसकी जांच के दौरान तत्कालीन तहसीलदार ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व से अनुमति लेकर सूक्ष्म जांच कर विधिवत कार्रवाई कर सर्वप्रथम सुमन देवी का नामांतरण निरस्त किया और साथ ही वसीम का नामांतरण भी निरस्त किया जिससे व्यथित होकर वसीम द्वारा माननीय व्यवहार न्यायालय में वाद प्रस्तुत किया और स्थगन चाहा रहा परंतु यहां सफलता ना मिलने पर जिला न्यायालय में अपील पेश की और साथ ही तहसीलदार के आदेश दिनांक 12 6 2017 की अपील अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मेघनगर के समक्ष की जिसको लेकर प्रतिप्रार्थी कालू और बहादुर ने अपना मत रखने के लिए विद्वान अधिवक्ता सलीम कादरी एवं जिया उल हक कादरी को नियुक्त किया विगत 2 वर्षों तक चले प्रकरण में प्रतिप्रार्थी की ओर से अधिवक्ताओं ने माननीय उच्चतम न्यायालय के कई न्याय दृष्टांत (रूलिंग) अपना पक्ष रखते हुए प्रस्तुत की वही माननीय न्यायालय को उक्त भूमि शासकीय होकर अवैधानिक तरीके से हड़पने के प्रयास को सिद्ध कर दिया जिस पर माननीय न्यायालय ने प्रतिप्रार्थी के वकील द्वारा प्रस्तुत तर्कों को स्वीकार करते हुए दिनांक 16.09.2019 में दिए गए अपने महत्वपूर्ण निर्णय में यह उल्लेख किया कि केवल आधिपत्य दर्शाया जाना ही स्वत्व अधिकार का प्रभाव नहीं है उससे अधिकार अर्जित नहीं होता तथा प्रतिप्रार्थी का पक्ष मजबूत होने से अधिनस्थ तहसील न्यायालय का आदेश दिनांक 11.05.2017 को हस्तक्षेप किया जाना उचित नहीं है अपीलर्थी वसीम द्वारा प्रस्तुत अपील खारिज की गई यहां यह उल्लेखित है कि माननीय अनुविभागीय अधिकारी न्यायालय ने अधिकारी तहसीलदार को निर्देशित किया कि शासकीय भूमि में निर्मित कालका माता मंदिर को शासकीय घोषित करने तथा पुजारी नियुक्ति की संपूर्ण आवश्यक कार्रवाई कर प्रस्ताव शीघ्र वरिष्ठ कार्यालय को भिजवाए तथा उक्त शासकीय भूमि का रजिस्ट्री विलेख को शून्य घोषित कराने हेतु न्यायालय में प्रशासन की ओर से अलग से वाद दायर करें माननीय अनुविभागीय अधिकारी पराग जैन के इस ऐतिहासिक निर्णय की सर्व समाज ने तारीफ की साथ ही नगर के जागरुक पत्रकारों की भी प्रशंसा की गई।
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