शिरपुर विधानसभा चुनाव में स्थानीय आदिवासी व बाहरी आदिवासी उम्मीदवार में भिड़ंत होने की संभावना

अब्दुल वाहिद काकर, ब्यूरो चीफ, धुले (महाराष्ट्र), NIT:

शिरपुर तहसिल में राजिनितीक माहौल काफी गरम है। कौन कब और कहां बीजीपी में दाखिला ले, तो कौन किस पार्टी का प्रत्याशी, तो कौन असली नकली के आरोप – प्रत्योरोप से तहसील की राजनीति में काफी उथल पुथल मची हुई है। इस बार शिरपुर विधानसभा में स्थानीय आदिवासी उम्मीदवार और बाहरी आदिवासी उम्मीदवार में जमकर भिड़ंत होने की आशंका व्यक्त की जा रही है जिसको लेकर तहसील की राजनीति पिछले कई दिनों से तप रही है।

कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले शिरपूर तहसील में भाजपा डॉ. जितेंद्र ठाकुर को अपना उम्मीदवार बना सकती है जिसके लिए केंद्रीय मंत्री रावसाहब दानवे के बयान को आधार माना जा सकता है।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रावसाहब दानवे पार्टी के बूथ सम्मेलन कार्यक्रम के लिए धुलिया मे आये थे। जिन्होंने कार्यक्रमके पश्चात प्रेसवार्ता आयोजित की थी। जिसमे उनको राज्य मे चर्चित और सदियों से कांग्रेस का गढ रहने वाले शिरपूर विधानसभा उम्मीदवार पर पार्टी के रवैय्ये को लेकर सवाल पुछा गया था की शिरपूर तहसिलमे असली और नकली आदिवासी को लेकर काफी घमासान मचा हुआ है। जिसपर दानवे ने उत्तर देते हुए कहा की,वैध सर्टीफिकेट जिसके पास वहीं उम्मीदवार होने की बात स्पष्ट कर दी। जिससे अब शिरपूर तहसिल का उम्मीदवार डॉ. जितेंद्र होने की संभावना बढ गई है। मामला कुछ भी हो लेकीन फिलहाल डॉ. जितेंद्र ठाकुरके पास कास्ट वैलिडीटी सर्टिफिकेट है। उनके पास पर्याप्त मात्रा में कार्यकर्ता संगठन और पिछले 5 वर्षों से तहसील में लगातार उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों का लंबा इतिहास है जो उनकी जीत की संभावना को दोगुना करता है वहीं पर कांग्रेसका वर्तमान विधायक काशीराम पावरा है जिन्होंने स्थानीय लोग बंगले का रिमोट कंट्रोल बोल कर संबोधित करते हैं उनके कार्य काल में तहसील क्षेत्र की सड़कें खस्ताहाल हैं तो पानी शिक्षा के लिए आदिवासी समुदाय के नागरिक दर दर भटकने पर विवश हुए हैं लोगों के मन में काशीराम पावर के प्रति भी आक्रोश है जिन्हें दस साल देने के बावजूद शिरपुर विधानसभा की कायापलट नही हो पाई है इस चुनाव में पढ़े-लिखे उच्च शिक्षित डॉ जितेंद्र ठाकुर से मतदाताओं को काफी उम्मीदें हैं और डॉक्टर होने के नाते उनके जनसंपर्क अभियान का लाभ उन्हें मिलेगा वही पर कांग्रेसी विधायक काशीराम पावर समुदाय से दूर बंगले में रहने जनसंपर्क का अभाव उन्हें इस चुनाव में अग्नि परीक्षा से कम नहीं होगा।



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