भोपाल। चुनाव अधिकारी का चयन करने के लिए किसी व्यक्ति में क्या योग्यता देखी जानी चाहिए। ऐसा व्यक्ति जिसे चुनाव प्रक्रियाओं का पूरा ज्ञान हो और जो बिना लालच या दवाब के निष्पक्ष चुनाव कराने में सक्षम हो परंतु मध्य प्रदेश में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह चाहते हैं कि ऐसे चुनाव अधिकारी भेजे जाएं जो चुनाव ना कराएं बल्कि सारे उम्मीदवारों से सौदेबाजी करके बड़े नेताओं के समर्थक को जिलाध्यक्ष बनवाकर लौट आएं। शर्त यह है कि इस प्रक्रिया की शिकायत नहीं आनी चाहिए। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह ने प्रदेश चुनाव अधिकारी व सह चुनाव अधिकारी के साथ बैठक में तय किया कि बिना किसी विवाद के सहमति से मंडल अध्यक्ष व जिलाध्यक्षों का चुनाव हो। यानी मतदान ना हो। इसके लिए जिलों में ऐसे नेता चुनाव अधिकारी बनाकर भेजा जाएं जो प्रमुख व बड़े नेताओं से बात करके निर्णय करें। यानी कार्यकर्ता नहीं बल्कि बड़ नेताओं की मर्जी का दावेदार जिलाध्यक्ष बनाया जाए। शर्त यह है कि किसी भी मामले में ऐसी स्थिति नहीं बने की विवाद भोपाल तक पहुंचे।
राकेश सिंह ने इस संबंध में चुनाव अधिकारी से कहा है कि वे आपस में बात करके चुनाव करवाने वाले ऐसे नाम निकालें। सूची तैयार होने के बाद सभी को बता दें कि वे जिला चुनाव अधिकारी बनने के बाद न तो मंडल और न ही जिलाध्यक्ष के चुनाव में भाग ले सकेंगे।
दिसंबर में होगा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष का निर्वाचन
भाजपा को सितंबर में बूथ, अक्टूबर में मंडल अध्यक्ष और नवंबर में जिलाध्यक्ष का चुनाव करना है। इसके बाद दिसंबर में दिल्ली से पर्यवेक्षक भोपाल आएंगे जो प्रदेश अध्यक्ष का निर्वाचन कराएंगे।
दो गुना होंगे सक्रिय सदस्य, बढ़ेंगे दावेदार
पार्टी ने सक्रिय सदस्यों का लक्ष्य दो गुना कर दिया है। अभी संख्या 56 जिलों के 851 मंडलों में एक लाख 25 हजार है। इसे इस बार ढाई लाख करने का लक्ष्य है। पार्टी ने इस बार सक्रिय सदस्यता का शुक्ल भी सामान्य वर्ग के कार्यकर्ता के लिए 400 रुपए से बढ़ाकर 500 कर दिया है। अजा-अजजा के लिए यह पूर्व की तरह 300 रुपए रहेगा। सक्रिय सदस्यता से खाते में 8 से 10 करोड़ रुपए आने की उम्मीद है।
मनोनीत जिलाध्यक्षों को हटाया नहीं जाएगा
पार्टी सूत्रों का कहना है कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मनोनीत किए गए जिलाध्यक्षों को पार्टी इस बार हटाने के मूड में नहीं है। प्रमुख नेताओं से बात करके उनका सहमति से निर्वाचन कराया जाएगा। जिन लाेगों को 3 साल या इससे अधिक वक्त हो गया है, वे बदले जाएंगे। पार्टी इस बार यह भी देखेगी कि जिन लोगों को आने वाला नगरीय निकाय चुनाव लड़ना है, उन्हें पद न दिया जाए।
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