भोपाल। भारतीय जनता पार्टी ने भोपाल में एक विशेष मीटिंग का आयोजन किया। संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी पर्यवेक्षक की हैसियत से उपस्थित थे। कई आमंत्रित पदाधिकारी आए नहीं। जो आए उनके बीच रायशुमारी की गई। यह जानने का प्रयास किया गया कि सुरेंद्रनाथ सिंह के गुमठी वाले आंदोलन से पार्टी के पदाधिकारी सहमत हैं या नहीं। पार्टी को गुमठी मम्मा के साथ खड़ा होना चाहिए या इसे उनका निजी आंदोलन मान लेना चाहिए।
बैठक में 19 मंडलों के अध्यक्ष व दो महामंत्री समेत 57 लोग, 7 मोर्चे के अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष समेत 23 जिला पदाधिकारी बुलाए गए थे, लेकिन इसमें कई लोग नहीं पहुंचे। चर्चा की शुरुआत पूर्व विधायक सुरेंद्रनाथ सिंह के गुमठी को लेकर किए जा रहे प्रदर्शन से हुई। जिला महामंत्री अनिल अग्रवाल ने कहा कि चार बार के जिलाध्यक्ष व पूर्व विधायक के लिए शहर जिलाध्यक्ष को सोच-समझकर बयान देना चाहिए। ऐसा नहीं कहना चाहिए कि जो फ्री हैं वे प्रदर्शन में जाएं। क्या वे अपने लिए प्रदर्शन कर रहे थे। ये तो सरकार के खिलाफ था। इस पर जिला उपाध्यक्ष केवल मिश्रा व राम बंसल ने भी सहमति जताई। जिला उपाध्यक्ष अशोक सैनी ने कहा कि जिले में अविश्वास का वातावरण है। स्थानीय नेता एक-दूसरे पर विश्वास का अभिनय करते हुए पार्टी का काम ईमानदारी से कर रहे हैं। जिला मंत्री जगदीश यादव ने कहा कि यही पता नहीं कि अभी पद पर हैं भी या नहीं। इसे साफ कर दें।
इसलिए बुलाई गई बैठक
पूर्व विधायक सुरेंद्रनाथ सिंह के गुमठी को लेकर किए जा रहे प्रदर्शन से संगठन के भीतर खींचतान चरम पर पहुंची। इस प्रदर्शन को लेकर पूर्व में शहर जिलाध्यक्ष विकास वीरानी ने यह बयान दे दिया था कि जो लोग फ्री हैं, वे प्रदर्शन में जाएं, बाकी लोग सदस्यता अभियान में लगें। इस पर कुछ लोगों ने नाराजगी जाहिर की। इसी बीच सुरेंद्रनाथ सिंह को 23 लाख की वसूली का नोटिस जारी हुआ तो पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पक्ष में खड़े हो गए। बाकी नेता भी आगे आए और प्रशासन से मिले, लेकिन इस दौरान गुटबाजी सामने आ चुकी थी। इसी को लेकर तिवारी ने बैठक बुलाई।
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