भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में रविवार को इतिहास बनाया गया। अवकाश के दिन ना केवल सदन लगा बल्कि कामकाज भी चला परंतु भाजपा नेता एवं पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा सहित भाजपा के विधायकों को यह सबकुछ मंजूर नहीं था इसलिए दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता स्व. शीला दीक्षित को श्रद्धांजलि के नाम सदन स्थगित करवा दिया। बता दें कि जब भाजपा सत्ता में थी तब भी नरोत्तम मिश्रा कई बार इसी तरह बेतुके हंगामे खड़े करके सदन को स्थगित करवा दिया करते थे।
अध्यक्ष ने बताया कि श्रद्धांजलि सुबह विधिवत दी जाएगी लेकिन भाजपाई नहीं माने
सदन में कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री हर्ष यादव के विभागों से संबंधित अनुदान मांगों पर चर्चा चल रही थी। इस बीच वरिष्ठ भाजपा विधायक डॉ नरोत्तम मिश्रा ने दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती दीक्षित को श्रद्धांजलि अर्पित करने का प्रस्ताव रख दिया। अध्यक्ष एन पी प्रजापति ने कहा कि श्रद्धांजलि कल सुबह विधिवत दी जाएगी। भाजपा के अनेक सदस्य एकसाथ खड़े होकर श्रद्धांजलि देने की बात पर अड़ गए। हंगामा होते देख सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी गयी।
भाजपा विधायक चाहते ही नहीं थे सदन में चर्चा हो
सदन समवेत होने पर भाजपा ने फिर अपनी बात दोहरायी। इस बीच अध्यक्ष ने शेष विभागों की अनुदान मांगों को बगैर चर्चा के पारित करा दियाइसके बाद मध्यप्रदेश के बजट से संबंधित विनियोग विधेयक पेश किया गया और कुछ ही पलों में उसे भी बगैर चर्चा (गिलोटिन) के पारित कराने की औपचारिकता पूरी की गयी। इसके बाद सदन की कार्यवाही सोमवार सुबह ग्यारह बजे तक स्थगित कर दी गयी।
सदन में आधी कार्रवाई के बाद श्रद्धांजलि नहीं दी जाती
नरोत्तम मिश्रा विधानसभा की परंपराओं के विशेषज्ञ हैं। वो बेहतर जानते हैं कि सदन प्रारंभ हो जाने के बाद श्रद्धांजलि नहीं दी जाती। आवश्यक हो तो सदन स्थगित कर दिया जाता है। श्रद्धांजलि हमेशा सत्र शुरू होने से पहले ही दी जाती है। यह अक्सर दिन की शुरूआत के प्रथम कार्यघंटे में दी जाती है। बावजूद इसके नरोत्तम मिश्रा ने ना केवल यह मांग उठाई बल्कि 2 बार हंगामा किया और सदन को चलने नहीं दिया।
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