कन्हैयालाल लक्षकार। मप्र में विगत विधानसभा चुनाव में वचन पत्र में कर्मचारियों के मुद्दे रखने पर कर्मचारियों ने भरोसे के साथ वर्तमान सरकार को सत्ता में आने का अवसर दिया। कमलनाथ सरकार से निवेदन है कि अपने वचन पत्र में शामिल कर्मचारियों की तमाम मांगों को लेकर एक साथ सभी आदेश प्रसारित कर दिये जावे।
सभी मांगों की समीक्षा कर आदेश में तिथियों का उल्लेख कर दिया जावे कि यह कब से प्रभावी होकर लागू होगा। इससे कर्मचारियों में संशय की स्थिति समाप्त हो जाएगी व प्रदेश में कर्मचारियों की लंबित समस्याओं की सूची भी सिमट जाएगी। पूरे प्रदेश में यदि कर्मचारी आंदोलन के दौर पर रोक लगती है तो निश्चित तौर से कार्य संस्कृति विकसित होगी। जिसका सीधा फायदा आम जनता को मिलेगा।
आम जनता को फायदा मतलब शासन की सफलता जिसका राजनीतिक माइलेज मिलना अवश्यंभावी होगा। सरकार का मूल उद्देश्य "कल्याणकारी" सरकार चलाना इससे पूरा हो सकता है। प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय कमलनाथ जी यदि गंभीरतापूर्वक चिंतन कर इच्छा शक्ति के साथ इसे लागू करते है, तो फायदे का सौदा है। सातवें वेतनमान के आधार पर मकान भाड़ा व अन्य प्रासंगिक भत्तो पर अनिर्णय की स्थिति से कर्मचारियों के साथ न्याय नहीं हो रहा हैं, इस पर प्राथमिकता की दरकार है।
लेखक श्री कन्हैयालाल लक्षकार, मप्र तृतीय वर्ग शासकीय कर्म संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष हैं।
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