भोपाल। हजारों करोड़ रुपए के ई-टेंडर घोटाले में जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू 6 जुलाई को पांच आरोपियों के खिलाफ स्पेशल कोर्ट में चालान पेश करेगी। इन आरोपियों में ऑस्मो सॉल्यूशन कंपनी के तीन डायरेक्टर विनय चौधरी, सुमित गोलवलकर, वरुण चतुर्वेदी, बेंगलुरू की एंट्रेस कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट मनोहर एमएन और भोपाल की माइल स्टोन कंपनी के संचालक मनीष खरे शामिल हैं। वहीं ईओडब्ल्यू ने एमपीएसईडीसी के नोडल अधिकार नंदकिशोर ब्रह्मे के खिलाफ चालान प्रस्तुत करने उसके मूल विभाग से अभियोजन की स्वीकृति मांगी है। सभी आरोपी सेंट्रल जेल में बंद हैं। मनीष को छोड़कर अन्य आरोपियों की जमानत अर्जी हाईकोर्ट भी खारिज कर चुका है।
ईओडब्ल्यू ने 10 अप्रैल 2019 को ई-टेंडर घोटाले में मंत्री-ब्यूरोक्रेट सहित 7 कंपनियों के संचालकों पर एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर के दो दिन बाद ही ईओडब्ल्यू ने विनय, सुमित, वरुण और ब्रह्मे को गिरफ्तार किया था। आरोपियों से हुई पूछताछ के बाद मनीष को गिरफ्तार किया था। मनोहर और मनीष को छोड़कर शेष आरोपियों की गिरफ्तारी को 90 दिन होने को हैं, ऐसे में जांच एजेंसी को कोर्ट में चालान प्रस्तुत करना है।
आरोप क्या हैं
ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के सर्वर का मेंटनेंस, नेटवर्किंग और हेल्प डेस्क सहित ज्यादातर काम एंट्रेस प्रालि. बेंगलुरू व टीसीएस के पास था। एंट्रेस के वाइस प्रेसिडेंट मनोहर एमएन हैं। एंट्रेस कंपनी कोे मध्य प्रदेश ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के डाटा को सुरक्षित नहीं रखने तथा गोपनीयता भंग करने का आरोपी माना गया है। एंट्रेस कंपनी के पदाधिकारियों ने ऑस्मो सॉल्यूशन कंपनी के डायरेक्टर आरोपी विनय चौधरी, एवं वरुण चतुर्वेदी को ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल की यूज़र आईडी एवं पासवर्ड की जानकारी दी थी।
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