भोपाल। ट्राइबल विभाग के अंतर्गत कार्यरत अध्यापक संवर्ग के पेंशन खातों में बहुत बड़ी गड़बड़ी उजागर हुई है। इसे ट्राइबल कमिश्नर की बहुत बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। अध्यापकों में आक्रोश है क्योकि उनके दोहरा नुक्सान हो रहा है। अध्यापकों का एक समूह इस मामले मेें ट्राइबल कमिश्नर की घेराबंदी करने की योजना बना रहा है।
उल्लेखनीय है कि अध्यापक संवर्ग को नवीन अंशदायी पेंशन योजना में शामिल किया गया है। इसके अंतर्गत कुल वेतन का 10 प्रतिशत अध्यापकों के वेतन से काटा जाता है तथा इतनी ही राशि सरकार अपनी ओर से मिलाकर उनके स्थायी पेंशन खाते में जमा करती है। अध्यापकों की शिकायत है कि इस योजना के अंतर्गत अध्यापकों के वेतन से राशि काट ली गयी किन्तु कभी भी समय पर राशि उनके खातों में जमा नहीं की गई।
जब अध्यापकों ने अपना खाता चेक किया तो उन्हें पता लगा कि 20-20 महीनों की राशि उनके वेतन से काट लिए जाने के बावजूद उनके प्रान खातों में जमा नहीं किया गया है। अब वह संकुल प्राचार्य से लेकर भोपाल तक चक्कर लगा रहे हैं, किन्तु उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वह अपना कटा पैसा अपने पेंशन खाते में जमा कराने के लिए क्या करें।
अध्यापकों ने अपने संगठन के माध्यम से भी NPS मिसिंग की बात प्रदेश के आला-अधिकारियों तक उठायी किन्तु कोई ठोस कार्यवाही अब तक नहीं हुई है। अध्यापकों को लगता है कि उनके पैसों के साथ कोई बड़ा घोटाला हो रहा है जिसमे प्रदेश स्तर के अधिकारी शामिल हैं। अधिकारियों की अनसुनी के कारण अब प्रभावित अध्यापक NPS की मिसिंग राशि नियमानुसार ब्याज सहित जमा कराए जाने हेतु कोर्ट की शरण मे जाने की तैयारी कर रहे हैं। वह इसे अधिकारियों की व्यक्तिगत लापरवाही के तौर पर कोर्ट में चुनौती देंगे।
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