भोपाल। मात्र 7 विधायकों की कमी के कारण सत्ता से दूर हो गई भाजपा से 1 विधायक घटने वाला है। 109 वाली भाजपा अब 108 की रह जाएगी। कांतिलाल भूरिया के सामने भाजपा ने झाबुआ विधायक जीएस डामोर को कमजोर कैंडिडेट मानकर टिकट दे दिया था परंतु राष्ट्रवाद की आंधी ऐसी चली कि डामोर जीत गए। अब रतलाम-झाबुआ सीट से सांसद बन गए हैं। सवाल यह है कि अब वो किस पद से इस्तीफा देंगे। लोकसभा या विधानसभा। खुद डामोर भी कंफ्यूज हैं अत: उन्होंने यह फैसला अमित शाह पर छोड़ दिया है।
जीती भाजपा लेकिन फायदा कांग्रेस को हुआ
23 मई को ही उन्होंने कांग्रेस की परंपरागत रतलाम-झाबुआ सीट से पूर्व सांसद कांतिलाल भूरिया को 90636 वोट से हराकर भाजपा की झोली में डाली है। फिलहाल वे देश के एकमात्र ऐसे सांसद है, जो विधायक भी हैं। नियमानुसार अब उन्हें एक पद छोड़ना होगा, जिसे लेकर चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। इन सब बातों पर कांग्रेस इसलिए कान लगाए बैठी है क्योंकि डामोर के इस्तीफा देते ही एक पद खाली हो जाएगा। जिसे भरने के लिए उपचुनाव होंगे, यानी कांग्रेस फिर एक बार संसदीय या विधानसभा सीट पर काबिज होने का मौका मिल जाएगा।
इस्तीफा देने पर ऐसे बिगड़ेगा सीट का हिसाब-किताब
लोकसभा चुनाव में एनडीए को 353 सीट मिली है, इनमें अकेले भाजपा की 303 है, जो बहुमत 272 से कही ज्यादा है। डामोर के इस्तीफा देने पर यह आंकड़ा 302 रह जाएगा, जिससे पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
डामोर के सांसद पद छोड़ने पर दोबारा यह सीट हासिल करना भाजपा के लिए चुनौती होगी। 2014 के चुनाव में यह सीट दिलीपसिंह भूरिया ने जीती थी। उनका निधन होने से महज 13 माह बाद ही 2015 में हुए उपचुनाव में यह सीट भाजपा हार गई थी।
230 सीट वाली विधानसभा में भाजपा के 109, जबकि कांग्रेस के 114 विधायक है। फिलहाल चार निर्दलीय, दो बसपा व एक सपा विधायक को साथ लेकर 121 विधायक को साथ लेकर कांग्रेस ने सरकार बना रखी है। ऐसे में डामोर के विधायक पद से इस्तीफा देने पर भाजपा की सीट एक और कम होकर 108 ही रह जाएगी।
केंद्र में सरकार बनने के बाद अब सुगबुगाहट चल पड़ी है कि कांग्रेस सरकार गिराकर भाजपा प्रदेश में सरकार बना सकती है। इसके लिए अभी के मान से उसे 7 विधायक जबकि डामोर के इस्तीफा देने पर 8 विधायक की जरूरत होगी, जो टेढ़ा काम है।
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रतलाम-झाबुआ संसदीय सीट जीतकर सांसद बने जीएस डामोर, झाबुआ सीट से विधायक भी हैं। उनके एक पद छोड़ने को लेकर संगठन विचार कर रहा है। अंतिम फैसला 30 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण के बाद सामने आएगा।
लोकेंद्र पाराशर, प्रदेश मीडिया प्रभारी, भाजपा
दिल्ली में पीएम मोदी से एक बार मुलाकात हो चुकी है। सांसद और विधायक में से कौन सा पद छोड़ना है, इसका फैसला संगठन लेगा। जैसा आदेश मिलेगा उसके मुताबिक आगे कदम बढाएंगे।
जीएस डामोर, नवनिर्वाचित सांसद
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