संदीप शुक्ला, ब्यूरो चीफ, ग्वालियर (मप्र), NIT:
मध्यप्रदेश में सत्ता तो बदल गई लेकिन विद्युत विभाग में चल रही ठेकेदारी प्रथा पर सरकार रोक नहीं लगा पाई है जिसका खामियाजा लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सरकार को भुगतना पड़ सकता है। भाजपा शासन काल से जमे बैठे अधिकारीगणों की सांठगांठ से विद्युत सब स्टेशन प्राइवेट ठेके पर दे दिए गए थे जो कहीं ना कहीं भाजपा समर्थक ठेकेदार ही हो सकते हैं जो आज लोकसभा चुनाव को भी प्रभावित कर सकते हैं जिसको हम आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन भी मान सकते हैं क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में भाजपा समर्थक ठेकेदार द्वारा लगाए गए विद्युत सब स्टेशनों पर प्राइवेट कर्मचारियों द्वारा ग्रामीण क्षेत्र पर बिजली कटौती को लेकर दबाव बनाया जा सकता है और इलेक्शन को एक पक्षी भी किया जा सकता है जिसका खामियाजा निश्चित तौर पर कांग्रेस को ही भुगतना पड़ सकता है।
सूत्रों की मानें तो विद्युत सब स्टेशन पर बिजली ऑपरेटर से लेकर विद्युत लाइन मैन तक प्राइवेट कर्मचारी लगा दिए गए हैं और दुर्घटना होने पर उनकी जवाबदारी कोई भी अधिकारी लेने से मना कर देता है तब इसका खामियाजा कर्मचारी के परिवारजनों को ही भुगतना पड़ता है। ऐसी स्थिति में पुलिस पर अधिकारियों और ठेकेदारों पर मामला दर्ज करने को लेकर दबाव बनाया जाता है तब स्थिति बिगड़ जाती है और मजबूरी में कभी अधिकारी तो कभी ठेकेदार पर एफ आईआरदर्ज हो जाती है। आखिर विभाग प्राइवेट कर्मचारियों से ऐसे जिम्मेदारी वाले काम क्यों करवाता है जबकि इन्हें केवल सहायता के लिए ही रखा गया है। ठेकेदारों द्वारा प्राइवेट कर्मचारियों को नियुक्त करते समय कोई भी संवैधानिक व्यवस्था नहीं अपनाई जाती है और ना ही पुलिस वेरिफिकेशन कराया जाता है, ऐसे लोगों को लोकल सब स्टेशनों पर रख दिया जाता है जिससे ग्रामीण क्षेत्र पर इनका दबदबा बना रहे। ऐसे लोग इस विभाग के लिए ट्रेंड भी नहीं होते हैं ऐसी स्थिति में अनट्रेंड कर्मचारियों को काम करवाने का ठेका दे दिया जाता है। विद्युत नियम 2003 जैसे कानून को अपने विद्युत विभाग के आला अधिकारियों ने गलत इस्तेमाल किया है। कब ठेके होते हैं और कब ठेके मिल जाते हैं इसका भी किसी के पास कोई जवाब नहीं है।
from New India Times http://bit.ly/2PwSr3k

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