भोपाल। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद पिछले 6 माह से लगातार विवादों में बना हुआ है। ताजा मामला प्रकाश में आया है। व्यापमं द्वारा आयोजित संयुक्त भर्ती परीक्षा 2015 के माध्यम से चयनित सभी 12 लेखापाल/लेखापाल सहलिपिकों की सेवा समाप्ति दिनांक 16/04/2019 को कर दी गई। चौंकाने वाली बात यह है कि बिना परीक्षा के भर्ती किए गए 418 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को घर बैठे वेतन दिया जा रहा है।
सेवा से हटाए गए सभी कर्मचारियों की सेवा 3 वर्ष से अधिक की हो गई थी। इसलिए मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद सेवा भर्ती नियम 2018 के अंतर्गत नियमितिकरण के पात्र थे। साथ ही सभी कर्मचारी एससी, एसटी, ओबीसी एवं विकलांग वर्ग से है। इन कर्मचारियों का ना ही किसी राजनीतिक दल या संस्था से कोई संबंध है विडंबना यह है कि, जिनका चयन बिना किसी लिखित परीक्षा के माध्यम से हुआ था ऐसे 418 अधिकारियों कर्मचारियों को सरकार नियमित कर घर में बैठा कर वेतन उपलब्ध करा रही है।
हटाऐ गये सभी कर्मचारियों को न्याय के लिए कई जनप्रतिनिधियों ने आवाज उठाई किंतु ये आवाज मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के कार्यपालक निदेशक तक नहीं पहुंच रही है। और समस्त कर्मचारी न्यापय के लिए दर बदर भटक रहे है।
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