भोपाल। लोकसभा स्वीकर सुमित्रा महाजन ने 2 महीने पहले से ही अपना चुनावी अभियान शुरू कर दिया है परंतु अब उनका टिकट भी उनके बेटे मंदार महाजन की तरह अटक गया है। लाल कृष्ण आडवाणी का टिकट काटने के बाद भाजपा में सख्ती के साथ फार्मूला 75 लागू हो गया है। आरएसएस भी इससे सहमत है। अत: अब कोई प्रश्न ही नहीं कि भाजपा 75 साल से अधिक के किसी व्यक्ति को लोकसभा का टिकट दे।
शानदार पारी खेल चुकीं हैं सुमित्रा महाजन
12 अप्रैल 1943 को महाराष्ट्र के चिपलुण में जन्मी सुमित्रा के पिता संघ प्रचारक थे। 71 बरस पहले 12 अप्रैल, 1943 को महाराष्ट्र के रत्नागिरि जिले के चिपलूण में एक साधारण से परिवार में जन्मी सुमित्रा महाजन 22 बरस की उम्र में बहू बनकर इंदौर आई थीं। उनके दो बेटे मिलिंद और मंदार हैं। मिलिंद आईटी प्रोफेशनल के साथ व्यवसाय भी करते हैं, वहीं मंदार कमर्शियल पायलट हैं, जिन्हे ताई ने अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बना दिया है। सुमित्रा महाजन लगतार 8 बार से सांसद बनती आईं हैं। अब देखना यह है कि वो सुषमा स्वराज की तरह आगे बढ़कर खुद ऐलान करतीं हैं या लाल कृष्ण आडवाणी की तरह पार्टी को उनका टिकट काटना पड़ेगा।
इंदौर में भाजपा 4 विधानसभा सीटें ताई के कारण हारी
कहा जाता है कि इंदौर में सुमित्रा महाजन के कारण भाजपा 4 सीटें हार गईं। सुमित्रा महाजन ने सुदर्शन गुप्ता, मनोज पटेल देपालपुर, मधु वर्मा और राजेश सोनकर सांवेर को टिकट दिलाए थे। ताई के सभी प्रत्याशी चुनाव हार गए। आरोप यह भी है कि ताई ने कांग्रेस के जीतू पटवारी की जीत को सुनिश्चित करते के लिए मधु वर्मा को टिकट दिलाया जबकि राउ से भाजपा के पास कुछ दमदार नाम भी थे।
पहली बार इंदौर में सुमित्रा महाजन का खुला विरोध
इंदौर में पहली बार सुमित्रा महाजन का खुला विरोध नजर आ रहा है। कार्यकर्ताओं का एक वर्ग स्पष्ट रूप से कह रहा है कि यदि इस बार भी ताई का टिकट दिया तो वो पार्टी के लिए चुनाव प्रचार नहीं करेंगे। कुछ लोग इससे आगे जाकर बगावत की बात भी कर रहे हैं। विरोधियों को मनाने में माहिर सुमित्रा महाजन इस बार भारी संख्या में उपस्थित विरोधियों को कैसे मना पाएंगी यह भी बड़ा प्रश्न है।
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