भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार का खजाना पूरी तरह से खाली हो गया है। सरकार उन वर्गों के कर्मचारियों का वेतन रोक रही है जिनकी संख्या कम है। भोपाल स्थित गैस राहत अस्पताल में कार्यरत 25 डॉक्टर्स का वेतन तीन माह से नहीं दिया गया। 14 हजार होमगार्ड कर्मचारियों का वेतन महीने भर से अटका हुआ है।
इसके अलावा अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय को सरकार की ओर से मिलने वाली ग्रांट रोक दी गई है। इससे विवि आर्थिक तंगी झेल रहा है। यहां के पांच प्रोफेसर्स, 45 अतिथि विद्वानों और 110 कर्मचारियों को करीब 35 लाख रुपए का वेतन दिया जाता है। वित्तीय वर्ष के अंत में ऐसी स्थिति बनने से कर्मचारियों में नाराजगी है। साथ ही इसका असर व्यवस्थाओं पर पड़ने लगा है। वहीं सरकार ने आय बढ़ाने के नए स्रोत तलाशने शुरू कर दिए हैं।
डॉक्टर हो रहे परेशान
गैस राहत अस्पताल में पदस्थ 28 संविदा चिकित्सक हैं। इनमें से 25 कार्यरत हैं, जिनका वेतन 50 हजार रुपए महीना है। उन्हें तीन माह से वेतन नहीं मिला। इनके अलावा फार्मासिस्ट, रेडियोग्राफर को भी वेतन नहीं मिल सका है। इन सबको 15 नवंबर तक वेतन का भुगतान किया गया है। वेतन न मिलने से परेशान कर्मचारी कई बार संचालक को ज्ञापन भी दे चुके हैं।
हिंदी विवि में बंटता है 35 लाख का वेतन :
अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय को सरकार की ओर से मिलने वाली ग्रांट की दो किश्तें अब तक विवि को नहीं मिल सकी हैं। विवि के अधिकारियों के मुताबिक दो किश्ते न मिलने से पिछले महीने का वेतन तो विवि ने जैसे-तैसे अपने फंड से दे दिया, लेकिन अब विवि के पास पैसा नहीं है। इधर, फैकल्टी और कर्मचारी रोज कुलपति और कुलसचिव के चक्कर काट रहे हैं। विवि को 3 करोड़ 90 लाख रुपए की सालाना ग्रांट मिलती है। इधर, उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रक्रिया चल रही है अगले सप्ताह वेतन मिलने की संभावना है।
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