नई दिल्ली। दिल्ली एवं नेशनल केपिटल रीजन जिसे NCR कहते हैं में शनिवार शाम भूकंप के तेज झटके आए। इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.1 दर्ज की गई है। फिलहाल कोई अशुभ समाचार नहीं आया है परंतु वैज्ञानिकों का कहना है कि खतरा अभी टला नहीं है। यह भूकंप फिर से आ सकता है। बता दें कि रिक्टर स्केल पर तीव्रता 7 के बाद भूकंप जानलेवा हो जाता है। इमारतें गिर जातीं हैं।
भूकंप का केंद्र हिंदुकुश पर्वत क्षेत्र बताया जा रहा है। अभी कहीं से भी किसी के हताहत होने की खबरें नहीं आईं हैं। वहीं, जम्मू संभाग के पुंछ जिले में भी भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए। बता दें कि जितना ज्यादा रिक्टर स्केल पर भूकंप आता है, उतना ही अधिक कंपन होता है। जैसे 7.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर जहां इमारतें गिर जाती हैं, वहीं 2.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर हल्का कंपन होता है।
गौरतलब है कि एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश के करीब 38 शहर हाई रिस्क सिस्मिक जोन में आते हैं। जबकि, 60 % भूभाग भूकंप को लेकर असुरक्षित हैं। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड के मुताबिक भारत में ज्यादातर निर्माण भूकंप को ध्यान में रखकर नहीं किए गए हैं। हालांकि इसके कुछ अपवादों में दिल्ली मेट्रो शामिल है। दिल्ली मेट्रो काे भूकंप के झटके सह सकता है।
भूकंप के समय भूमि के कंपन के अधिकतम आयाम और किसी आर्बिट्रेरी छोटे आयाम के अनुपात के साधारण गणित को 'रिक्टर पैमाना' कहते हैं। 'रिक्टर पैमाने' का पूरा नाम रिक्टर परिमाण परीक्षण पैमाना है। बता दें कि अंडमान-निकोबार के कुछ इलाके को जोन-5 में रखे गए हैं।
दिल्ली, पटना, श्रीनगर, कोहिमा, पांडुचेरी, गुवाहाटी, गैंगटॉक, शिमला, देहरादून, इंफाल और चंडीगढ़, अंबाला, अमृतसर, लुधियाना, रुड़की सिस्मिक जोन 4 और 5 में आते हैं। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, उत्तर बिहार और अंडमान-निकोबार के कुछ इलाके जोन-5 में रखे गए हैं।
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