
इस स्टडी में एक और बात सामने आई है कि हमारे जूतों-चप्पलों में 7 अलग-अलग तरह के 27 प्रतिशत बैक्टीरिया होते हैं, जो हमारे पाचन तंत्र से लेकर श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं। जबकि घर के बाहर इन्हें रखने पर हमारा फ्लोर और प्राइवेट रूम इनसे प्रभावित होने से बच जाता है। इस रिसर्च से यह सामने आया है कि हम जिन पब्लिक टॉयलेट्स का इस्तेमाल करते हैं, उसमें 2 मिलियन बैक्टीरिया प्रति स्क्वायर इंच के हिसाब से पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों कहना है कि आप सड़क पर पड़े कुत्ते की गंध और अन्य गन्दी चीजों से खुद को साफ समझते हैं, पर बारिश और पानी के सम्पर्क में आने पर उनके बैक्टीरिया आपके जूतों तक पहुंच जाते हैं। तो समझ गये न आप कि ऐसे नियम कहीं न कहीं हमारे भले के लिये ही बनाये गये हैं।
from News85.in http://bit.ly/2VwK6iM
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