“सब गोलमाल है बाबा सब गोलमाल है”: वर्षों से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियों व कर्मचारियों का क्यों नहीं हो पा रहा है तबादला???

रहीम शेरानी हिंदुस्तानी, ब्यूरो चीफ झाबुआ (मप्र), NIT:

आदमी अपनी कटीं नाक को लोगों को दिखाने से बचाने के लिए किस तरह दूसरे की नाक कटा देता है इसे लेकर मालवा का एक किस्सा खासा प्रचलित है। गांव में एक धनी महिला रहती थी। एक बार 4 चोरों ने उस महिला के यहां चोरी करने की योजना बनाई, इस योजना की भनक उस महिला को लगी तो उस महिला ने चारों चोरों को सबक सिखाने की ठान ली। रात होते ही चारों चोर सेंध लगाने लगे, पहले एक चोर ने दीवार में छेद कर जैसे ही अपना मुंह अंदर किया तो पहले से तैयार खड़ी महिला ने झट से उस चोर की नाक धारदार हथियार से काट दी। अपनी कटी हुई नाक को रुमाल से छुपा कर चोर वापस लौटा और तीनों से बोला यार बड़ी दुर्गंध (बदबु) आ रही है, तुम लोग अंदर जाओ, तीनों में से एक अन्य चोर अंदर गया तो उसकी भी नाक उस महिला ने काट दी, उसने भी दुर्गंध (बदबु) का बहाना कर अपनी कटी नाक छुपा कर अन्य चोर को अंदर भेजा, इस तरह एक-एक कर जब चारों की नाक कट गई तो आपस में लड़ पड़े की क्यों एक दूसरों की नाक कटवा दी। कुछ इसी तरह के हालात से गुजर रहा है मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले का शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग। जिले के करीब करीब विद्यालय से जुड़े अन्य जिम्मेदार वह स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अन्य जिम्मेदार अधिकारी सेंधमारी के चक्कर में एक दूसरे की नाक काटने पर आमादा हैं। मामला चाहे रिश्वतखोरी का हो या फर्जी बिलों का हो या फिर घटिया सामग्री खरीदी का प्रकरण हो या गैर जिम्मेदाराना ढंग से कराए गए विद्यालय भवन एवं स्वस्थ भवनों के घटिया निर्माण कार्य एवं मरम्मत रंगाई पुताई का लगभग हर जगह सांठ गांठ के संकेत मिल रहे हैं।

झाबुआ जिले के ग्रामीण क्षेत्र की विद्यालयों में अधिकतर शिक्षक एवं शिक्षिकाएं ताले जड़ कर अपने घर चले जाते हैं और अक्सर नदारद रहते हैं। निरीक्षण करने पर हकीकत सामने आ सकती है मगर जिम्मेदार अधिकारी सरकारी रिवाईनिंग चेयर पर से उठकर जिले में चल रही आदिवासियों की योजना को सही तरीके से संचालित करवाकर एवं जो शिक्षक एवं शिक्षिका नदारद रहते हैं उन्हें निलंबित कर देश के नमक का कर्ज चुका पाएं तो हमें बड़ी प्रशन्नता होगी साथ ही झाबुआ जिले के मेघनगर के स्वास्थ विभाग में मनमाने तबादले के लिए पूर्व में सौदे बाजी हुई थी जहां भ्रष्टाचारी कर्मचारियों को कोई हटा नहीं सका और हटा भी दिया था तो वह वापस भेंट पूजा चढ़ाकर अपने तबादले रुकवाने में सफल हो गए। कहते हैं जहां लक्ष्मी की माया होती है वहां गुण अवगुण देष ईर्ष्या वैमनस्यता और मतभेद सब परे धकेल दिए जाते हैं। जिन कर्मचारियों के पूर्व में तबादले हो गए थे वह भेंट पूजा चढ़ाकर वापस आ गए हैं और अपनी पुरानी शैली को ना बदल कर ग्रामीण आदिवासी महिलाओं से डिलीवरी करवाने के एवज में 500 से 700 रुपये लेकर गरीब आदिवासियों का शोषण कर रहे हैं क्योंकि अपने तबादले रुकवाने में दलालों को जो हजारों रुपए दिए हैं अब यह लाखों रुपए वसूलेंगे और इसी तरह आदिवासियों का शोषण करते रहेंगे। अपने मानव धर्म को ताक पर रखकर गरीबों के धन को दीमक की तरह चट कर जाएंगे और हमारे आदर्शवादी नेता मूक्तदर्शक बनकर देखते रहेंगे। फिर भी तीसरी आंख देखती रहेगी और हम जनमानस की समस्याओं के लिए शासन प्रशासन का ध्यान इस ओर दिलाते रहेंगे।



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