
बाल देखभाल संस्थानों पर जेना कमेटी की जारी रिपोर्ट के मुताबिक, किशोर न्याय कानून के अंतर्गत कमेटी या बोर्ड जिन बच्चों के माता-पिता या अभिभावकों उनकी देखरेख के लिए अनुपयुक्त मानता है, ऐसे बच्चों को देखभाल और संरक्षण की जरूरत होती है।
रिपोर्ट के मुताबिक पाया गया कि इस श्रेणी में सीसीआई और बाल गृहों में 0-6 वर्ष आयु वर्ग में 5,291 बच्चे, 7-18 आयु वर्ग में 1,78,885 बच्चे मिले। लड़कियों की तुलना में लड़कों की संख्या 17.2 प्रतिशत अधिक थी। इनमें सबसे ज्यादा ऐसे बच्चे आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में मिले।
रिपोर्ट के मुताबिक कुल 1.8 लाख बच्चे बाल देखभाल संस्थाओं में रह रहे थे क्योंकि उनके अभिभावक या माता-पिता उनकी देखभाल करने में सक्षम नहीं थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि 3.7 लाख से ज्यादा बच्चों को देखभाल और संरक्षण की जरूरत थी। इसमें 0-6 आयु वर्ग में 5900 बच्चे अनाथ, बेसहारा थे। जबकि, सात-18 उम्र समूह में 50276 बच्चे बेसहारा थे।
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