भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शपथग्रहण के तत्काल बाद किसान कर्ज माफी के बाद जो दूसरा काम किया वो है उद्योगों के लिए नई छूट नीति का ऐलान। इस नीति के तहत प्रदेश के उद्योगों में 70 फ़ीसद रोजगार मध्य प्रदेश के युवाओं को दिए जाएंगे। यानि मध्यप्रदेश में अब ऐसे ही उद्योगों को छूट मिलेगी जो कि 70 फीसद रोजगार स्थानीय लोगों को देंगे। कमलनाथ ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, 'हमारी छूट देने वाली नीति उन उद्योगों के लिए होगी, जहां 70 फ़ीसदी रोज़गार मध्य प्रदेश के युवाओं को दिया जाएगा।' उन्होंने आगे कहा, 'उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से लोग मध्य प्रदेश आते हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को नौकरी नहीं मिल पाती है। मैंने इसी से संबंधित फाइल को मंज़ूरी दे दी है।
अमेरिका ने भी अपनाया है संरक्षणवाद का सिद्धांत
देखने में आ रहा है कि इन दिनों प्रदेशों ही नहीं बड़े-बड़े देशों के बीच संरक्षणवाद का सिद्धांत पैर पसार रहा है। चाहे बात अमेरिका में स्थानीय उद्योगों और युवाओं को बढ़ावा देने की बात हो या फिर हाल ही भारत के गुजरात में हुए विवाद की बात हो। जिसमें यूपी-बिहार के लोगों को प्रदेश से खदेड़ा गया। हरेक राज्य अपने स्थानीय युवाओं और संसाधनों को संरक्षित करने पर जोर दे रहा है। कमलनाथ का ये फैसला भी उसी संरक्षणवाद के सिद्धांत पर आधारित है।
सरकारी नौकरियों में भी संरक्षणवाद की मांग
बता दें कि मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरियों में भी स्थानीय को संरक्षण देने की मांग लम्बे समय से उठ रही है। मप्र पुलिस भर्ती के दौरान बेरोजगारों ने कई प्रदर्शन भी किए थे। मप्र के बेरोजगारों का तर्क है कि जब दूसरे राज्यों में स्थानीय उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाती है तो मप्र की सरकार उदारवादी क्यों बनी हुई है। देखना यह है कि प्राइवेट के बाद अब सरकारी नौकरियों के लिए कमलनाथ क्या फैसला लेते हैं।
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