भोपाल। कश्मीर से जारी बर्फबारी का असर प्रदेश के मौसम पर दिखना शुरू हो गया है। बर्फ से ढंके पहाड़ों से टकराकर आने वाली उत्तरी हवाओं ने सिहरन बढ़ा दी है। ग्वालियर में इसका ज्यादा असर देखा जा रहा है। यहां न्यूनतम तापमान 7.9 डिग्री दर्ज किया गया है। शनिवार को भोपाल में 13.3 डिग्री दर्ज किया गया। 21 दिसंबर से कश्मीर घाटी में 40 दिन का चिल्ला कलां शुरू हो रहा है। इसके बाद हड्डी कंपा देने वाली सर्दी का दौर शुरू हो जाएगा।
मौसम विभाग के अनुसार भोपाल में 15 दिसंबर के बाद से सुबह और शाम को कड़ाके की ठंड का अहसास होने लगेगा। इस दौरान सामान्य तापमान में मामूली इजाफा देखने को मिलेगा। ग्वालियर में कड़ाके की ठंड का दौर शुरू हो गया है। वैसे भी प्रदेश में सबसे ज्यादा सर्दी ग्वालियर-चंबल संभाग में ही पड़ती है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार सात नवंबर से ही प्रदेश में सर्दी का अहसास होने लगा था। तब मौसम के मिजाज को देखकर लग रहा था कि इस बार कड़ाके की सर्दी पड़ सकती है।
वेस्टर्न डिस्टरबेंस हिमालय में सक्रिय:
सर्दी के लिए जरूरी कारक वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर मध्यप्रदेश को प्रभावित नहीं कर सका। अगर वेस्टर्न डिस्टरबेंस का केंद्र जम्मू-कश्मीर होता तो इस समय भोपाल सहित पूरे प्रदेश में कड़ाके की सर्दी पड़ रही होती, लेकिन इस बार वेस्टर्न डिस्टरबेंस का केंद्र हिमालय है। बर्फीली हवाओं को रुख भी विपरीत दिशा में है। इसलिए कड़ाके की सर्दी का दौर अभी शुरू होने की उम्मीद कम है।
21 दिसंबर से शुरू होगा चिल्ला कलां:
कश्मीर घाटी में 40 दिन हड्डी तक कंपा देने वाली सर्दी को चिल्ला कलां कहा जाता है। इस बार इसका दौर 21 दिसंबर से शुरू होगा। जो 31 जनवरी तक रहेगा। चिल्ला कलां की समाप्ति के साथ चिल्ला खुर्द की शुरूआत होती है। इसमें चिल्ला कलां के मुकाबले कम ठंड़ होती है, इसकी अवधि 20 दिन होती है। इसके बाद सर्दी का आखिरी पड़ाव 10 दिन की अवधी का होगा, जिसे कश्मीर में चिल्ला बच्चा के नाम से पुकारा जाता है।
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