इंदौर। कोर्ट के माध्यम से रजिस्टर्ड मैरिज करने के लिए नियम बदल दिए गए हैं। पहले इसके लिए एक लम्बी प्रक्रिया से गुजरना होता था। वकील के माध्यम से दस्तावेज पेश किए जाते थे। एसपी आॅफिस से एक रिपोर्ट आती थी। एसडीएम की रिपोर्ट भी लगती थी। शादी रजिस्टर्ड करते समय पुजारी भी अनिवार्य था परंतु अब सारे नियम बदल दिए गए हैं।
कलेक्टोरेट में शादी करने वाले आवेदकों को सोमवार से बड़ी राहत मिल जाएगी। इन शादियों में अब पुजारी की जरूरत को खत्म कर दिया है। वकील के माध्यम से दस्तावेज पेश करने की अनिवार्यता को भी खत्म कर दिया है। आवेदक खुद लगने वाले दस्तावेज सामान्य आवेदन के साथ पेश कर सकेंगे। एसपी ऑफिस से लगने वाली रिपोर्ट को भी खत्म कर दिया है। एसडीएम ऑफिस से आने वाली रिपोर्ट में एक पायदान खत्म करते हुए केवल तहसीलदार की रिपोर्ट को ही मान्य करने का संशोधन किया गया है, इससे प्रक्रिया तेज हो सकेगी।
विवाह अधिकारी व अपर कलेक्टर कैलाश वानखेड़े ने इस संबंध में कलेक्टर निशांत वरवड़े से चर्चा कर प्रक्रियाओं की कठिनाई बताई थी, जिसके बाद उन्हें इसमें संशोधन के लिए हरी झंडी दी गई और आखिर में ये बदलाव मंजूर कर लागू किए गए। कलेक्टोरेट में औसतन हर माह 70 से 80 शादियां होती हैं।
आवेदकों से पूछा क्या दिक्कत आती है
वानखेड़े एक माह से कलेक्टोरेट में शादी के लिए आने वाले आवेदकों से ही बात कर रहे थे कि उन्हें प्रक्रिया में क्या-क्या समस्या आई। 50 से अधिक जोड़ों से बात करने और विवाह एक्ट में मिले अधिकारों का अध्ययन करने के बाद यह संशोधन लागू करने के आदेश जारी कर दिए। कलेक्टोरेट में आवेदन के लिए 500 रु. आवेदन शुल्क के साथ 15 रु. का चालान व 100 रुपए का स्टाम्प लगता है।
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