भोपाल। कांग्रेस में कहा जाता है कि दिग्विजय सिंह की कथनी और करनी में बड़ा अंतर होता है। वो एक मंझे हुए कलाकार की तरह व्यवहार करते हैं। किसी सार्वजनिक स्थल पर उनके प्यार और दुलार का अर्थ उनका आशीर्वाद नहीं होता परंतु एक प्रसंग यह भी बता रहा है कि कमलनाथ वचनबद्ध इंसान हैं। 25 साल बाद बड़ा ही श्रम करके दिग्विजय सिंह ने कमलनाथ का एक कर्ज उतारा है।
कमलनाथ का कर्ज क्या था
1993 में जब दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री बने थे, उस वक़्त कमलनाथ ने उनका साथ दिया था। इस बारे में राज्य के वरिष्ठ राजनीतिक पत्रकार संजीव श्रीवास्तव बताते हैं, "1993 में प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर दिग्विजय सिंह का दावा मज़बूत ज़रूर था, लेकिन अर्जुन सिंह जैसे नेता सुभाष यादव के नाम को आगे बढ़ा रहे थे, माधव राव सिंधिया भी होड़ में थे, तब कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह का साथ दिया था। दिग्विजय अगर मुख्यमंत्री बन पाए थे तो उसमें कमलनाथ की अहम भूमिका रही थी। इसलिए 2018 में अपने समर्थकों के बीच कई बार दिग्विजय सिंह ने इस क़र्ज़ का ज़िक्र भी किया कि कमलनाथ जी ने हमारी मदद की थी, इस बार उनको मुख्यमंत्री बनाना है।
दिग्विजय सिंह ने कैसे उतारा
दिग्विजय सिंह ने ना केवल नर्मदा परिक्रमा की बल्कि नाराज लोगों की गोलबंदी भी की।
दिग्विजय सिंह ने ना केवल एकता यात्रा निकाली बल्कि कांग्रेस में निश्चित तौर पर होने वाली बगावत को काफी कम कर दिया और जमीनी कार्यकर्ता को एक्टिव किया जो जीत का बड़ा कारण बने।
इस सारी प्रक्रिया में दिग्विजय सिंह ने अपने जीवन का करीब 1 साल लगाया। इस प्रक्रिया में दिग्विजय सिंह ने दिन और रात लगातार काम किया। लक्ष्य के अलावा कुछ भी नहीं किया। यहां तक कि संगठन में रुसवाई और बदनामी भी सहन की।
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