अशफाक कायमखानी, जयपुर (राजस्थान), NIT:
हाल ही में पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के रजल्ट के बाद तीन राज्यों में बनी कांग्रेस सरकारो ने अपने नेता राहुल गांधी के चुनाव प्रचार के समय सभाओ को सम्बोधित करते हुये यह कहने पर कि अगर कांग्रेस सरकार बनती है तो दस दिन में किसानों के कर्ज माफ कर दिये जाएंगे को ध्यान में रखते हुए दो लाख रुपये तक का किसानों का कर्जा माफ होने को अमलीजामा पहनाते हुये राजस्थान, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकारों ने दो लाख रुपयों तक किसानों का कर्जा माफ करने की घोषणा करने के बाद साफ लगने लगा कि भारत के पांच माह बाद होने वाले आम लोकसभा चुनावों मे “किसान” भारतीय राजनीति का केंद्र बिन्दु व किसान कर्जा प्रमुख मुद्दा बनने वाला है।
भारत में एचडी देवेगौडा के प्रधानमंत्री काल के पूरा होने के बाद भारत की राजनीति किसानों से अलग हटकर काॅरपोरेट घरानों के हित साधने की तरफ जाना शुरु होकर पिछले महिने तक उसी ढर्रे पर चल रही थी, लेकिन हताश हो चुकी कांग्रेस ने जुमलेबाजी करने वाली मोदी सरकार की पार्टी भाजपा सरकारों को प्रदेश से उखाड़ फेंकने के लिये किसानों का कर्ज माफ करने का कहकर किसानों का मत पाने की हमदर्दी पाकर सरकारें बना कर वादे के मुताबिक लोन माफ करके किसानों का भरोसा जीत लेने के बाद अब साफ नजर आने लगा है कि करीब पच्चीस साल बाद फिर किसान वर्ग भारतीय राजनीति का एक अहम मुद्दा बनने जा रहा है।

मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ व राजस्थान जैसे तीन प्रदेशों मे कांग्रेस सरकार बनने के बाद आसाम की भाजपा सरकार ने किसानों का कर्ज माफ करने व गुजरात की भाजपा सरकार ने बिजली बिल माफ करने की घोषणा करने पर मजबूर हुई है। लेकिन कर्जा माफी की घोषणा का राजनीतिक लाभ जितना कांग्रेस को मिलेगा उतना शायद भाजपा को किसी हालत में मिलने वाला नही है। तीन प्रदेश की सरकारों द्वारा कर्ज माफी करने के बाद करीब पच्चास हजार करोड़ रुपयो का अतिरिक्त भार उन तीनों प्रदेश की सरकारों को झेलना होगा। लेकिन तीनों सरकारों ने अपने नेता राहुल गांधी की घोषणा पर पूरी तरह अमल करके जनता का विश्वास जीत लिया है। जबकि भारतीय जनता के मन में एक भावना पूरी तरह घर कर गई है कि भाजपा बडे बडे उधोगपतियों व काॅरपोरेट घरानों का कर्ज माफ करती है। जबकि कांग्रेस किसानों की दशा सुधारने व उनके आत्महत्या करने से बचाने के लिये किसानों का कर्ज माफ करने लगी है।
कुल मिलाकर यह है कि पांच माह बाद भारत में होने वाले आम लोकसभा चुनावों मे भाजपा चाहे मंदिर मुद्दे को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश करे लेकिन किसान व गरीबी ही हर हाल में प्रमुख मुद्दा बनकर रहेगा। हाल ही में पांच राज्यों मे सम्पन्न हुये विधानसभा चुनावों के पहले पंजाब व कर्नाटक के विधानसभा चुनावों मे भी कर्जा माफी की घोषणा करने वाले दलों को ही मोदी इफेक्ट के बावजूद सरकार बनाने का अवसर मिला है।
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