नई दिल्ली। भारत में शायद ही कोई ऐसा हो जो ऑटोरिक्शा चालक से पीड़ित ना हुआ हो। वो आपको चेहरा देखते हैं और जरूरत के हिसाब से उनका किराया बदल जाता है। मीटिर की बात ना ही करें तो अच्छा है। 80 प्रतिशत देश में ऑटोरिक्शा में मीटर होते ही नहीं, होते हैं तो खराब होते हैं। खराब नहीं भी होते तो ऑटोरिक्शा चालक मीटर के हिसाब से चलने को तैयार नहीं होता। सबसे बड़ा सवाल होता है ऑटोरिक्शा के लिए उचित किराया क्या है। अब गूगल इस सवाल का जवाब देगा।
गूगल मैप के जरिए रास्ता खोजना लोगों के लिए काफी आसान हो गया। साथ ही लोगों को गूगल मैप के जरिए दूसरी सुविधाएं भी मिलती हैं। इस क्रम में टेक कंपनी गूगल ने एक नई सुविधा का ऐलान किया है। अब दिल्ली में लोग गूगल मैप के जरिए ऑटोरिक्शा के रास्ते और अनुमानित किराए को देखा जा सकता है।
गूगल ने कहा है कि 'दिल्ली के लोग गूगल मैप पर एक और सार्वजनिक परिवहन ऑटोरिक्शा के रास्ते देख सकेंगे। इस परिवहन विकल्प का चुनाव करने के साथ ही यात्री ना सिर्फ ऑटो रिक्शा से जुड़े रास्ते देख सकेंगे बल्कि उन्हें उतनी दूरी का अनुमानित किराया भी पता चल सकेगा। जल्द ही यह सारे भारत में लागू कर दिया जाएगा।
साथ ही कंपनी के जरिए कहा गया कि ऑटोरिक्शा का संभावित किराया दिल्ली यातायात पुलिस के जरिए साझा किए गए आधिकारिक किराया प्रणाली के अनुरूप होगा। लोगों को यह सुविधा एंड्रायड फोन पर मिल सकेगी।
यानी अब ओला/उबर जैसे एप भी लूट नहीं पाएंगे
इस प्रणाली पर ओला/उबर जैसे एप भी काम करते हैं परंतु उनके किराए भी वक्त और ट्रैफिके के हिसाब से बदलते रहते हैं। कई बार तो ओला का आॅटो किसी दूसरे एप की टैक्सी के महंगा पड़ता है। लोग एक काम के लिए बहुत सारे एप तो डाउनलोड करते नहीं। इसलिए ठगे जाते हैं। गूगल की इस पहल से कम से कम एप आधारित आॅटो सेवा की लूट से भी राहत मिल जाएगी।
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