SBI बैंक ने ग्राहकों के लिए किया बड़ा एेलान….

नई दिल्ली, SBI बैंक ने ग्राहकों के लिए  बड़ा एेलान  किया है.एसबीआई बैंक ने पर्सनल लोन पर प्रोसेसिंग फीस जीरो कर दी है. मतलब साफ है कि अब ग्राहकों को लोन लेने के लिए कोई चार्ज नहीं देना होगा. इस ऑफर का फायदा 30 नवंबर तक की उठाया जा सकता है.

इंजीनियरिंग छात्रों को दे रहा निशुल्क कोचिंग 11 साल का ये बच्चा

सरकार देगीं इन सरकारी कर्मचारियों को स्मार्टफोन….

जब आप लोन लेते हैं तो इससे जुड़े भी कई खर्च होते हैं. इसमें ब्याज का भुगतान,  प्रोसेसिंग फीस, एडम‍िनिस्ट्र‍िटेटिव चार्जेस, प्रीपेमेंट पेनल्टीज समेत अन्य शामिल हैं. एसबीआई ने लोन लेने से पहले लगने वाले चार्जेस को खत्म कर दिया है. बैंक की ओर दी गई जानकारी के मुताबिक, 30 नवंबर तक पर्सनल लोन लेने वालों पर ये चार्ज अप्लाई नहीं होंगे.

मुलायम सिंह की बहू अपर्णा ने किया बड़ा खुलासा,बताया अखिलेश- शिवपाल में से किसकों चुनेगीं

त्यौहार पर रेल यात्रियों को सरकार ने दिया बड़ा तोहफा, किया ये बड़ा परिवर्तन

आम तौर पर बैंक सालाना 10 फीसदी से 18 फीसदी तक इंटरेस्‍ट रेट पर पर्सनल लोन देते हैं. पर्सनल लोन का इंटरेस्‍ट रेट आपकी इनकम प्रोफाइल के आधार पर तय होता है. आप किस कंपनी में नौकरी करते हैं. आपकी सैलरी कितनी है. इसके अलावा अगर आपका सैलरी अकाउंट उस बैंक मं है जहां से आप पर्सनल लोन लेना चाहते हैं तो बैंक आपको कम इंटरेस्‍ट रेट पर पर्सनल लोन दे सकता है.

फर्जी मुठभेड़ के शिकार, जितेंद्र यादव को लेकर आयोग, योगी सरकार पर हुआ सख्त, दिये ये आदेश

सीएम योगी आदित्यनाथ के बयान पर, अखिलेश यादव ने ली कुछ यूं चुटकी

एसबीआई की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, पर्सनल लोन का इंटरेस्‍ट रेट डेली / मंथली रिडयूशिंग बैंलेंस मेथेडेलॉजी से कैलकुलेट करते हैं. अगर आसान शब्दों में समझे तो पर्सनल लोन पर इंटरेस्‍ट बचे हुए लोन अमाउंट पर कैलकुलेट किया जाता है. इसका नतीजा यह होता है कि आपकी हर ईएमआई या रिपेमेंट के साथ ब्‍याज कम होता जाता है. इस तरह से आपके पर्सनल लोन पर इफेक्टिव इंटरेस्‍ट बहुत कम हो जाता है.

सरदार पटेल की ‘स्टैच्यू आॅफ यूनिटी‘ पर अखिलेश यादव ने कही ये बात

मायावती ने क्यों कहा कि बहुजन समाज से माफी मांगें बीजेपी और आरएसएस ?

एसबीआई के अनुसार एनुअल रिड्यूशिंग बैलेंस मेथेड में साल की शुरुआत में आपके बकाया पर्सनल लोन पर इंटरेस्‍ट कैलकुलेट किया जाता है. इसका नतीजा यह होता है कि आने वाले एक साल में आप जो ईएमआई या रिपेमेंट कर देते हैं आपको उस पर भी इंटरेस्‍ट का भुगतान करना होता है. इस तरीके से आपका इफेक्टिव ब्‍याज एक साल के बाद ही कम होता है.



from News85.in https://ift.tt/2qqZvCQ