भोपाल। भाजपा में परिवारवाद जारी है परंतु चुपके चुपके। वंशवाद का नया संस्करण उत्तराधिकार ला दिया गया है। कई टिकट दे दिए। कैलाश विजयवर्गीय अब भी बेटे के टिकट का इंतजार कर रहे हैं। कई नेतापुत्र टिकट पा चुके हैं, कई अब भी इंतजार में हैं। इधर कांग्रेस ने डंके की चोट पर परिवारवाद को स्वीकार किया। पहली ही लिस्ट में कई नाम सामने आ गए।
हेमंत कटारे, लक्ष्मण सिंह, जयवर्धन सिंह, आलोक चतुर्वेदी, कमलेश्वर पटेल, हिना लिखी राम कावरे, रजनीश हरवंश सिंह, सचिन यादव इसके अलावा झाबुआ से विक्रांत भूरिया, थांदला से वीर सिंह भूरिया और जोबट से कलावती भूरिया को टिकट दिया गया है।
कांग्रेस परिवारवाद को खुलेआम स्वीकार करती है। हालांकि राहुल गांधी ने कुछ सिद्धांतों की बात की थी परंतु उनके सारे सिद्धांत दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया नाम के 2 पाटों के बीच में पिसकर रह गए। दलबलुओं को भी टिकट थमा दिया गया है। कांग्रेस में भी विद्रोह के स्वर सुनाई देने लगे हैं।
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