भोपाल। कर्मचारी संगठन सपाक्स के संरक्षक से सपाक्स पार्टी के अध्यक्ष बने पूर्व आईएएस हीरालाल त्रिवेदी के खिलाफ एक बार फिर नाराजगी देखी जा रही है। हीरालाल त्रिवेदी और ललित श़ास्त्री के मतभेद तो सबको पता चलते ही जा रहे हैं, अब हीरालाल त्रिवेदी पर तानाशाही का आरोप लगा है। त्रिवेदी ने सपाक्स पार्टी के नाम पर चुने हुए प्रत्याशियों को संपूर्ण समाज पार्टी के नाम पर लड़ाने का ऐलान कर दिया। सपाक्स पार्टी के पदाधिकारियों का कहना है कि इससे पहले उनकी राय तक नहीं ली गई।
त्रिवेदी ने अचानक गठबंधन का ऐलान कर दिया
हीरालाल त्रिवेदी ने चुनाव अधिसूचना जारी होने के ठीक पहले अचानक ऐलान किया कि सपाक्स पार्टी के प्रत्याशी अब संपूर्ण समाज पार्टी (ससपा) के नाम और चुनाव चिन्ह से लड़ेंगे। संपूर्ण समाज पार्टी के अध्यक्ष डाॅ.केएस तोमर को बनाया गया है। वे शुरूआत से ही सपाक्स से जुड़े हैं। हालांकि वो यह नहीं बता पाए कि सपाक्स के लिए उन्होंने अब तक क्या क्या किया। त्रिवेदी ने कहा कि सपाक्स को अब तक चुनाव चिन्ह का आवंटन नहीं हुआ था। इस वजह से संपूर्ण समाज पार्टी के चुनाव चिन्ह पर सपाक्स प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरेंगे। डॉ. तोमर के दिमनी से चुनाव लड़ने की संभावना है।
सपाक्स पार्टी का रजिस्ट्रेशन तक नहीं करा पाए त्रिवेदी
हीरालाल त्रिवेदी भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे हैं। कागजी कार्रवाई में वो इतने कच्चे होंगे कोई उम्मीद भी नहीं कर सकता था। हर शिक्षित व्यक्ति यह जानता है कि संगठन के नाम का ऐलान करने से पहले उसका रजिस्ट्रेशन करा लिया जाता है परंतु हीरालाल त्रिवेदी ने बिना रजिस्ट्रेशन के ही सपाक्स पार्टी के नाम और झंडे का ऐलान कर दिया। उम्मीद थी कि पूर्व आईएएस होने के कारण हीरालाल त्रिवेदी प्रशासनिक पकड़ वाले व्यक्ति होंगे और चुनाव से पहले रजिस्ट्रेशन करा ही लेंगे परंतु ऐसा भी नहीं हुआ। अब त्रिवेदी के हाथ में केवल झंडा रह गया है।
क्या शिवराज सिंह के इशारे पर हुआ सबकुछ
हीरालाल त्रिवेदी के बारे में कांग्रेस नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बयान दिया था कि वो शिवराज सिंह से मिले हुए हैं और भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं। कहीं यह सबकुछ जो हुआ वो शिवराज सिंह के इशारे पर तो नहीं हुआ। त्रिवेदी ने जान बूझकर पार्टी के रजिस्ट्रेशन को टाला और अब गठबंधन करके सपाक्स का नाम ही खत्म कर दिया। क्या ऐसा भी होगा कि जिस सीट से त्रिवेदी चुनाव लड़ेंगे वहां से भाजपा कमजोर प्रत्याशी उतारेगी या फिर चुनाव बाद त्रिवेदी को मलाई वाली कुर्सी दी जाएगी। संदेह कुछ भी हो सकता है। हौआ सपाक्स का था, ससपा को कौन जानता है।
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