भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में जहां एक ओर संविदा कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी में लगाकर उन्हे सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया गया वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश ग्रामीण विकास विभाग कई संविदा कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दीं। जबकि सीएम शिवराज सिंह ने ऐलान किया था कि एक भी संविदा कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाला जाएगा।
शुभम भार्गव ने भोपाल समाचार डॉट कॉम को बताया कि ग्रामीण विकास विभाग के द्वारा राजीव गांधी वाटर शेड मिशन के प्रोजेक्ट्स में एमपी ऑनलाइन के द्वारा सन 2014 में संविदा के पद पर ब्लॉक जल ग्रहण अभियंता ब ब्लॉक जल ग्रहण समन्वयक की भर्ती की गई थी। जैसा कि आपको पता है की 2018 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा कई जगह सभाओं में संविदा के नियमितीकरण संबंधी कई घोषणाएं की गई जिसके प्रतिपल स्वरूप 5 जून 2018 को संविदा नीति का प्रस्ताव पास हुआ एवं सामान्य प्रशासन विभाग के द्वारा एक पत्र भी जारी किया गया जिसमें उल्लेख किया गया कि किसी भी संविदा इंजीनियर को व ब्लॉक जल ग्रहण समन्वय को बिना कारण के नौकरी से नहीं निकाला जाएगा।
अभी जो पत्र पंचायत विकास विभाग के द्वारा प्राप्त हुए हैं उसमें वाटर शेड के बहुत सारे प्रोजेक्ट को बंद करने के साथ-साथ उनके स्टाफ को भी 30 नवंबर 2018 के बाद बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इसके बाद संविदा कर्मचारियों में एक बार फिर दहशत पसर गई है। क्या चुनाव बाद सरकार अपने वादे से मुकर जाएगी। क्या मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा संविदा कर्मचारियों से किए गए वादे और घोषणाएं सब झूठे थे।
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