
उन्होंने बताया कि इन गुफाओं को हाथों से खोदा जाता है और दीवारों को मिट्टी से लेपा जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘यदि आप मिट्टी का मकान बनाते हैं तो यह बारिश में ढह जाता है। लेकिन यह नहीं ढहता। ये भूकंप प्रूफ और बम प्रूफ हैं। ’’ इन गुफाओं में कुछ कमरे होते हैं और एक बरामदा होता है। यहां रहने वाले अमीर उल्ला खान ने बताया, ‘‘ यह अपेक्षाकृत सस्ता है…हमने इसे खुद ही खोदा।’’आधुनिक युग की गुफाओं में रहने वाले वाशिंदों ने इन ढांचों को पाकिस्तान के मौसम के अनुकूल बताया है। यह गर्मियों में ठंडी रहती है जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाता है। वहीं, कड़ाके की ठंड में यह गर्माहट महसूस कराती है।
हालांकि, इन गुफाओं में रहना आसान नहीं है क्योंकि इनके अंदर सूरज की रोशनी नहीं पहुंच पाती हैं। इसलिए अंदर टीवी चलाने के लिए बाहर से बिजली के तार ले जाए जाते हैं। वहीं, अंदर पानी की पाइपलाइन और नल की व्यवस्था एक विलासिता है जो कम ही दिखती है।
साकी रियाज नाम के एक रियल स्टेट एजेंट ने बताया कि यहां तक कि गांव देहात में भी एक मकान बनाने के लिए जमीन का छोटा सा टुकड़ा खरीदने में कम से कम 10 लाख रूपये (पाकिस्तानी मुद्रा) चाहिए। एक स्थानीय मौलवी ने एक बड़ा आवासीय परिसर बनाया है , जहां काफी संख्या में श्रद्धालु धार्मिक उत्सवों पर पहुंचते हैं। पाकिस्तान के नये प्रधानमंत्री इमरान खान ने कम से कम 50 लाख मकान बनाकर आवास के संकट को दूर करने का वादा किया है।
एएफपी
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