दुबहड़ (बलिया)। भोजपुरी के नाम पर अश्लीलता परोसने का जो नाटक हो रहा है, इससे समाज के लोग बेहद चिंतित हैं. इसको लेकर क्षेत्र के संगीत प्रेमियों एवं गायकों की बैठक शिवपुर दियर नई बस्ती के ढाला स्थित मंगल चबूतरा पर शुक्रवार की देर शाम हुई. जिसमें वक्ताओं ने भोजपुरी गीतों में अश्लीलता परोसने पर समाज में पड़ने वाले असर पर अपने विचार रखे.
कवि व शिक्षक गणेश जी सिंह ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने विभिन्न विधाओं जैसे कजरी, पूर्वी, सोरठी, अल्हा, विरहा एवं विदेशिया जैसी जीवंत शैली के माध्यम से ही उन गुढ़ शब्दों को समाज के सामने लाने एवं युवा पीढ़ी को समझाने व बताने का हमेशा प्रयास निरंतर जारी रखा, लेकिन दुर्भाग्य है कि आज अधिकांश गायक गीतकार भोजपुरी को ठीक ढंग से न समझ गीतों में अंग्रेजी, उर्दू जैसी भाषाओं के अश्लील शब्दों को डालकर सस्ती लोकप्रियता हासिल कर लेना चाहते है. जो भोजपुरी भाषा के लिए घातक सिद्ध हो रहा हैं.
सामाजिक चिंतक एवं गीतकार बब्बन विद्यार्थी ने कहा कि भाषाओं की धुरी हमारी भोजपुरी अश्लील हो ही नहीं सकती. अगर अश्लील है तो भोजपुरी नही हो सकती, क्योंकि भोजपुरी में अश्लीलता का कोई स्थान ही नहीं है. आज कुछ कलाकार पैसा व सोहरत कमाने की होड़ में मर्यादा और परम्परा को भूलते जा रहे है. जो बेहद शर्मनाक हैं. रंगकर्मी पन्नालाल गुप्त, अशोक मधुकर, रविन्द्र तिवारी, संतोष शर्मा, यशवंत सिंह, सरल पासवान आदि मौजूद रहे. संचालन गायक राजेश पाठक ने किया.
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