मेला के लिए अधिग्रहित भूमि का मुआवजा बढ़ाने की कर रहे थे मांग
बलिया। ऐतिहासिक ददरी के पशु मेला में पहले दिन आठ नवम्बर को मिश्रनेवरी के कास्तकारों ने नगर पालिका परिषद बलिया के मेला कार्यालय पर हमला बोल दिया. कास्तकारों का तांडव कैम्प कार्यालय के समा होने तक जारी रहा. इसको लेकर पशु मेला में भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई. जिला मजिस्ट्रेटो ने मामले की जांच का आदेश दिया है,
नगर पालिका परिषद बलिया की ओर से प्रत्येक वर्ष एक माह तक चलने वाले ददरी मेला का आयोजन किया जाता है. एक माह के लिए नगर पालिका कार्यालय उठकर मेला में आ जाता है। सभी अधिकारी व कर्मचारी मेला कैम्प में ही कामगाज निपटाते है. पशु मेला के बाद मीना बाजार का आयोजन किया जाता है. एक किमी लम्बा लगाने वाले मीना बाजार में दूर-दूर के व्यापारी आते है.
घोषित कार्यक्रम के अनुसार इस वर्ष पशु मेला का आयोजन आठ नवम्बर से 22 नवम्बर तक लिए घोषित किया गया. मेला लगने से पूर्व सांसद भरत सिंह व जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत ने मेला तैयारी का जायजा लिया था और तैयारी पर असंतोष जताया था. मेला भूमि के कास्तकार अधिग्रहित भूमि का मुआवजा बढ़ाने की मांग कर रहे थे. किसानों का कहना है कि अर्से हो गए जमीन का मुआवजा 1200 रूपये प्रति एकड़ ही मिलता है. सांसद भरत सिंह ने जिलाधिकारी से मुआवजा की राशि बढ़ाने का निर्देश दिया था.
किसान मुआवजा राशि 15 हजार रूपये प्रति एकड़ करने की मांग कर रहे थे. नगर पालिका परिषद मेला लगने से पूर्व मुआवजा राशि में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं की. मेला लगने के प्रथम दिन ही किसानों ने मेला कार्यालय पर हमला बोलकर ध्वस्त कर दिया. कार्यालय कर्मचारियों के सामने विकट स्थिति उत्पन्न हो गई इस मामले में प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत ने सिटी मजिस्ट्रेट डा. विश्राम व सदर एसडीएम को जांच कर अपनी संस्तुति भेजने का निर्देश दिया है.
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