भोपाल। कांग्रेस में टिकट बंटवारे के लेकर बवाल शुरू हो गया है। अनुसूचित जनजाति विभाग ने एक रिपोर्ट तैयार की है। इसमें बताया गया है कि आदिवासियों के लिए आरक्षित 47 सीटों के अलावा सामान्य वर्ग की 47 सीटें ऐसी हैं जहां आदिवासी वोटर्स की संख्या 25 हजार से ज्यादा है। विभाग चाहता है कि यहां से भी आदिवासी उम्मीदवार उतारे जाएं। रिपोर्ट में अनुसूचित जाति की 6 सीटों पर भी आदिवासी मतदाताओं की संख्या 25 हजार से ज्यादा बताई गई है परंतु यहां से विभाग ने दावेदारी नहीं की है।
पत्रकार श्री रवींद्र कैलासिया की रिपोर्ट के अनुसार सामान्य और अनुसूचित जाति की जिन सीटों पर आदिवासी मतदाताओं की प्रभावी भूमिका का दावा किया जा रहा है, उनमें सतना की पांच, छिंदवाड़ा की चार, रीवा, जबलपुर, बैतूल, सीधी, खरगोन, कटनी की तीन-तीन, बालाघाट, होशंगाबाद, रायसेन, धार, सिवनी, शिवपुरी, पन्ना की दो-दो, नरसिंहपुर, सागर, दमोह, सीहोर, इंदौर, देवास, खंडवा, झाबुआ, श्योपुर, गुना, सिंगरौली, अनुपपुर, हरदा की एकएक सीटें शामिल हैं। 28 जिलों की 53 विधानसभा सीटों पर 25 हजार से ज्यादा आदिवासियों की मतदाता संख्या बताई जा रही है।
सामान्य वर्ग की इन सीटों पर दाव
विजयपुर, पोहरी, कोलारस, बामौरी, देवरी, जबेरा, पवई, पन्ना, चित्रकूट, नागौद, मैहर, अमरपाटन, रामपुर बघेलान, सिरमोर, त्योंथर, मऊगंज, चुरहट, सीधी, सिहावल, सिंगरौली, कोतमा, विजयराघौगढ़, बहोरीबंद, मुड़वारा, पाटन, पनागर, लांजी, परसवाड़ा, सिवनी, केवलारी, चौरई, सौंसर, मुलताई, बैतूल, हरदा, सिवनी मालवा, भोजपुर, सिलवानी, बुदनी, खातेगांव, मंधाता, महेश्वर, कसरावद, धार, बदनावर, डॉ. आंबेडकर नगर महू।
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