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नोएडा के सेक्टर-99 में स्थित सुप्रीम सोसायटी के एक फ्लैट में रविवार को 52 वर्षीय महिला की 25 दिन पुरानी सड़ी-गली लाश बरामद हुई है। मृतका एक मीडिया हाउस में काम करती थीं। पति से तलाक के बाद वह करीब 2 साल से यहां अकेली रह रही थीं। फ्लैट से बदबू आने पर मकान मालिक ने इसकी सूचना बेंगलुरु में रह रह उनके बेटे को दी। रविवार सुबह पुलिस को साथ लेकर आए बेटे ने दरवाजे का ताला तुड़वाकर शव बाहर निकलवाया।
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पुलिस के मुताबिक सुप्रीम सोसायटी के टावर नंबर-10 की 16वीं मंजिल पर स्थित फ्लैट में बबिता बसु अकेले रहती थी। पति मधुसूदन पाल चौधरी से उनका करीब 15 साल पहले तलाक हो चुका था। वह यहां एक मीडिया हाउस में काम करती थीं। उनका बेटा सिद्धार्थ बेंगलुरु की कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजिनियर है। वह करीब 5 साल से वहीं नौकरी कर रहा है। बबिता बसु को किडनी की समस्या थी, जिसके चलते उन्हें हर हफ्ते दिल्ली के अस्पताल में डायलसिस के लिए जाना पड़ता था।
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बीमारी और अकेलेपन की वजह से वह अक्सर फ्लैट में ही बंद रहती थीं। दिल्ली निवासी फ्लैट मालिक अरुण सतीजा के मुताबिक उन्होंने बबिता को यह फ्लैट करीब 20 महीने पहले किराये पर दिया था। अब उसका रेंट अग्रीमेंट रिन्यू होना था। इसके लिए वे 15- 20 दिन से बबिता बसु को फोन कर रहे थे, लेकिन कोई कॉल नहीं उठा रहा था। इसके बाद हफ्ता भर पहले उन्होंने बेंगलुरु में रहने वाले बबिता के बेटे सिद्धार्थ को फोन किया और सारी बात बताई।
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सिद्धार्थ के कहने पर वह शनिवार रात फ्लैट पर पहुंचे तो वहां से बदबू आ रही थी। हालांकि फ्लैट बंद था, लेकिन उसके अंदर की लाइटें जली हुई थीं। किसी अनहोनी की आशंका में उन्होंने तुरंत सिद्धार्थ को फोन करके सूचना दी। सिद्धार्थ रविवार सुबह सोसायटी में पहुंचा और फिर पुलिस को सूचना देकर फ्लैट का दरवाजा तोड़ा गया। अंदर एक कमरे में बबिता की करीब 20- 25 दिन पुरानी लाश पड़ी थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। वहां से रिपोर्ट आने के बाद मामले में अगली कार्रवाई की जाएगी।
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पुलिस के मुताबिक 19 सितंबर को बबिता की बेटे सिद्धार्थ से बात हुई थी। बबिता ने अपनी बीमारी के बारे में बताकर सिद्धार्थ को नोएडा बुलाया था। सिद्धार्थ ने काम का दबाव बताकर दिवाली पर आने की बात कही। इसके बाद सिद्धार्थ ने मां की कोई खोज-खबर नहीं ली। जब सिद्धार्थ से पूछा गया कि बीमारी के बावजूद वह मां को रोजाना कॉल क्यों नहीं करता था, तो उसने बताया कि वह अक्सर 20- 25 दिन में ही मां को फोन करता था।
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