PEB: पटवारी और आरक्षक के बाद अब समूह 4 में भी री-एग्जाम, कहीं कोई घोटाला तो नहीं | MP NEWS

भोपाल। प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड (पीईबी) द्वारा समूह 4 के अंतर्गत सहायक ग्रेड-तीन स्टेनोग्राफर, स्टेनो टाइपिस्ट, डाटा एंट्री ऑपरेटर एवं अन्य समकक्ष पदों के लिए आयोजित की गई परीक्षा से वंचित रहे उम्मीदवारों के लिए दोबारा से परीक्षा 15 सितंबर को आयोजित की जा रही है। इससे पहले पटवारी और आरक्षक भर्ती परीक्षा में भी री-एग्जाम हुए थे। उम्मीदवारों ने सवाल उठाना शुरू कर दिए हैं कि यह नई परंपरा क्यों शुरू की गई। कहीं कोई नया घोटाला तो नहीं है। बता दें कि इसी संस्थान का व्यापमं घोटाला देश भर में चर्चित रहा है। बदनामी के डर से सरकार ने संस्थान का नाम ही बदल दिया। 

करीब एक दर्जन से ज्यादा उम्मीदवारों ने भोपाल समाचार को ईमेल भेजे हैं। इनमें कई तीखे सवाल भी किए गए हैं। लिखा है: पटवारी में री-एग्जाम, आरक्षक में री-एग्जाम, अब ग्रुप 4 में भी री-एग्जाम आखिर ये कौन कौन से विशेष लोग है इनकी सूची सार्वजनिक क्यों नही की जाती? इनका रिजल्ट सार्वजनिक क्यों नही किया जाता ? बार बार हर परीक्षा में री-एग्जाम करा के क्या कोई घोटाला किया जा रहा है। री-एग्जाम में पारदर्शिता क्यों नहीं है। 

क्या गड़बड़ी होती हैं लगभग हर परीक्षा में:-
1. प्रश्न गलत:- हर परीक्षा में पहले तो 2-4 प्रश्नों की संरचना ही गलत रहती है। 
2. उत्तर गलत:- बोर्ड द्वारा जारी की गई उत्तर कुंजी में सभी शिफ्ट के पेपर को देखे तो 20 से 25 प्रश्रों के उत्तर गलत दिए जाते है। क्या यह जानबूझकर होता है। किसी को फायदा पहुंचाने के लिए।
3. नॉर्मलाइजेशन:- अगर खुद व्यापमं के नियंत्रक और संचालक से परीक्षा दिलाई जाए तो 50 प्रतिशत से ज्यादा स्कोर नही कर पाएंगे और वे यह कहकर छात्रों द्वारा प्राप्त किये गए अंको को बढ़ा-घटा देते है कि आपका पेपर सरल था आपका कठिन था। इसका कोई निर्धारित पैमाना नहीं है। बस कुछ अधिकारी मिलकर तय कर लेते हैं कि कौन सा पेपर सरल था कौन सा कठिन। 
4. री-एग्जाम:- अब एक नई परंपरा बन गई है। कौन पात्र, कौन अपात्र, सूची कहां है, रिजल्ट कहां कुछ पता नहीं। सबकुछ अंधेरे में रहता है। 

उम्मीदवारों का कहना है कि हम परीक्षा के लिए फीस अदा करते हैं। संशाधन जुटाना पीईबी का काम है। तरीका सिर्फ एक ही होना चाहिए। 1 परीक्षा, 1 दिन, 1 ही पेपर और 15 दिन में रिजल्ट। उम्मीदवार भड़क रहे हैं। यदि जिम्मेदारों ने जल्द निर्णय नही लिया तो चुनाव से पहले यह मामला भी सोशल मीडिया से उतरकर बैनर पोस्टर्स और सड़कों पर आ सकता है। 
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