उपदेश अवस्थी। साफ-साफ नजर आ रहा है कि मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया सिर्फ और सिर्फ आँखों में धूल झोंकने का धंधा मात्र है। ठीक वही हो रहा है जैसी की उम्मीद पहले भी जताई थी। ये सरकार मतदान से पहले परीक्षा तक नहीं कराएगी। बस आवेदन किए जा सकेंगे। एक दशक पहले तक सरकारें ऐसी हरकतें करने से पहले डरा करतीं थीं परंतु अब हालात बदल गए हैं, क्योंकि जनता अब भीड़ बन गई है और भीड़ को हांकना, जनता को साधने से ज्यादा आसान होता है।
भर्ती नहीं, वोट जुटाने की साजिश है
2013 में यही शिवराज सिंह थे जिन्होंने ऐलान किया था कि अब हर साल शिक्षक भर्ती परीक्षा कराई जाएगी। स्कूलों में शिक्षकों की कमी नहीं रहने दी जाएगी। देखते ही देखते 70 हजार पद खाली हो गए, 5 साल बीत गए। ना सरकार ने भर्ती कराई, ना विपक्ष ने उसे मजबूर किया। मीडिया में भी कुछ ही पत्रकार हैं, जिन्होंने बेरोजगारों की आवाज उठाई। बार-बार, कई बार। सरकार को समझाया कि लोगों में गुस्सा है। बताया कि करीब 12 लाख उम्मीदवार इस परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार की नियत साफ नहीं थी इसलिए भर्ती नहीं कराई। बस बयान जारी होते रहे। अब जबकि चुनावी माहौल है। नाराजों को साधने का क्रम जारी है तो भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। 1 सितम्बर को सीएम शिवराज सिंह ने एक बार फिर बयान दिया कि भर्ती प्रक्रिया इसी माह शुरू होगी। यानि उन्होंने प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड को 30 सितम्बर तक का समय दे दिया। 5 अक्टूबर को आचार संहिता लग जाएगी। विपक्ष इसे चुनावी भर्ती कहेगा और मतदान से पहले आवेदन जमा कराने के अलावा कुछ नहीं हो पाएगा। चुनाव बाद किसी भी विवाद को लेकर भर्ती स्थगित की जा सकती है। ऐसा पीईबी पहले भी कर चुका है।
वो तो शुक्र है ऐसा नहीं किया
वो तो शुक्र है कि किसी ने यह आइडिया नहीं दिया नहीं तो 12 लाख उम्मीदवार परेशान हो जाते। हो यह भी सकता था, भोपाल के जम्बूरी मैदान में मध्यप्रदेश के इतिहास में अब तक का सबसे भव्य रोजगार मेले का आयोजन किया जाता। ऐलान कर दिया जाता कि केवल इसी मेले में आने वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकेंगे। फिर नौकरी की तलाश में लाखों उम्मीदवार भोपाल आते और सीएम शिवराज सिंह उन्हे 45 मिनट का 'शिवराज चालीसा' सुनाते। हां, कुछ दूसरे मामलों में ऐसा कई बार हो चुका है। किसी ने आइडिया नहीं दिया नहीं तो इस भर्ती में भी ऐसा ही चुका हो जाता।
तो अब उम्मीदवार क्या करें ?
अब कुछ भी नहीं किया जा सकता। पीईबी लिंक खोलेगा तो आवेदन भी करना ही होंगे लेकिन एक बात की जा सकती है। सरकार को यह एहसास दिलाया जा सकता है कि मध्यप्रदेश में भीड़ नहीं जनता रहती है। इस तरह आँखों में धूल नहीं झोंकी जा सकती। लोकतंत्र आपको सवाल पूछने का अधिकार देता है। दुनिया वाट्सएप और फेसबुक ग्रुपों में मैसेज फार्वर्ड करने से नहीं चलती। अध्ययन और डिस्कशन से चलती है। खुद सोचिए, खुद समझिए और फिर सवाल कीजिए। उससे जो वोट मांगने आएगा। चाहे वो आॅनलाइन आए या आॅफलाइन। सवाल सिर्फ भाजपा से नहीं कांग्रेस से भी करना। वोट उनको भी दिया था। जनता को न्याय दिलाने की संवैधानिक जिम्मेदारी है। विपक्ष के नेताओं को भी सरकारी आवास और सुविधाएं मिलतीं हैं। वो सिर्फ सरकार पर दोष देकर दूर नहीं हट सकते। यदि ऐसा किया तो भर्ती प्रक्रिया चुनाव बाद ईमानदारी से पूरी हो सकेगी। नहीं किया तो भीड़ हांक दी जाएगी, जैसे कि पिछले 5 सालों से हांकी जा रही है।
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