इंदौर। मप्र हाउसिंग बोर्ड की हालत खस्ता हो गई है। पूरा देश डिजिटल हो गया परंतु हाउसिंग बोर्ड आज भी 80 के ढर्रे पर चल रहा है। घटिया निर्माण और ग्राहक को लूटने वाले नियमों ने लोगों का हाउसिंग बोर्ड की तरफ से मोहभंग कर दिया है। कई संपत्तियां 10 साल से बिना बिके खंडहर हो रहीं हैं। अब हाउसिंग बोर्ड ने जिन नियमों के नाम पर ग्राहकों को आंख दिखाई थी, उन्हे शिथिल करके हाथ मिलाने की योजना बनाई है।
वन टाइम सेटलमेंट स्कीम
बोर्ड ने ऐसे खरीदारों के लिए ‘वन टाइम सेटलमेंट स्कीम’ लागू की है। इसके तहत खरीदार राजसात संपत्ति दोबारा प्राप्त कर सकेंगे। बोर्ड चेयरमैन कृष्णमुरारी मोघे ने इस निर्णय की पुष्टि की है। बोर्ड में नियम है कि जो व्यक्ति नीलामी में संपत्ति खरीदता है, उसे संपत्ति की पूरी कीमत 30 दिन में बिना ब्याज के चुकाना होती है। यदि 30 दिन में चुका नहीं पाए तो 120 दिन में राशि ब्याज सहित जमा कराई जा सकती है। उसके बाद संपत्ति का ऑफर निरस्त कर संपत्ति राजसात कर ली जाती है। बाद में उसी संपत्ति का दोबारा ऑफर बुलाने के बाद संपत्ति की आधी कीमत पूर्व खरीदार को लौटा दी जाती है।
अब क्या करेंगे
ताजा निर्णय में ऐसे पूर्व खरीदार 31 दिसंबर तक राजसात संपत्ति के लिए एक मुश्त योजना के तहत राशि जमा कर सकते हैं। उन्हें ब्याज में भी 50 प्रतिशत छूट भी जाएगी। उसके बाद ऑफर जीवित कर संपत्ति सौंप दी जाएगी। ऑफर में 50 लाख रुपए व उससे अधिक की संपत्ति खरीदने पर राशि 12 माह में जमा कराई जा सकेगी। अब तक नियम 120 दिन में जमा नहीं करने पर संपत्ति राजसात कर ली जाती थी।
घाटे से बचने के लिए योजना
हाल ही में हुई बोर्ड बैठक में विचार किया गया कि नीलामी में बोली लगाने वाले ऑफर कर्ता की संपत्ति का ऑफर निरस्त करने के बाद दोबारा ऑफर बुलाने की प्रक्रिया में समय लग जाता है। अकसर ऑफर कर्ता को बैंकों से लोन लेने में देरी पर समय बढ़ाने की मांग करता है। कई ऑफरकर्ता अदालत जाते हैं। राजसात संपत्ति का दोबारा ऑफर बुलाने पर उसकी कीमत प्राय: कम हो जाती है जिससे बोर्ड को आर्थिक नुकसान होता है।
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