जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में थे तैनात, हृदयाघात से हुई मौत
नगरा(बलिया)। गुरुवार की रात सेना के जवान हेमंत कुमार पांडेय का शव पैतृक गांव सिसवारकला पहुंचा. शव पहुंचते ही एकाएक गांव का माहौल गमगीन हो गया. एक तरफ जवान के मां लालमुनि का रो रो कर बुरा हाल था, तो दूसरी तरफ उसकी पत्नी सीमा की चीत्कार से लोगों की आंखें नम हो जा रही थीं.
बेटा संस्कार और बेटी संस्कृति की आंखें उस ताबूत को निहार रही थी, जिसमें उनके पापा का शव तिरंगे में लपेटा हुआ था. देश की रक्षा का जज्बा लिए सेना में भर्ती हुए हेमंत पांडेय के निधन का समाचार क्षेत्र में आग की तरह फैल गया. सैकड़ो संख्या में भीड़ उनके दरवाजे पर पहुंच गई. चार भाइयों में तीसरे नंबर के हेमंत ही एक मात्र घर के कमाऊ सदस्य थे. अन्य भाइयों में दो प्राइवेट नौकरी तो सबसे छोटा भाई गांव में रहकर ही खेतीबारी का काम करता है.
हेमंत का निजी जीवन भी सादगी से भरा था. गांव वाले तारीफ करत नहीं थम रहे थे. अपने सरल स्वभाव के कारण हेमंत हमेशा गांव के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत रहे. उसकी मार्गदर्शन में गांव में बहुतेरे जवान सेना में भर्ती हुए हैं. हेमंत ने बड़े प्यार से अपने बेटे का नाम संस्कार और बेटी का संस्कृति रखा था.
बीते जून में रांची में पोस्टिंग के दौरान गांव में एक महीना की छुट्टी पर आये थे. इसके बाद उसका तबादला जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में कर दिया गया. जहां मंगलवार की शाम को हृदयाघात से मौत हो गई.
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