भोपाल। शिवराज सिंह कैबिनेट के सबसे कद्दावर मंत्री एवं भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार नरोत्तम मिश्रा पेडन्यूज मामले में फिर से फंसते नजर आ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में चुनाव आयोग ने दावा किया है कि वो न्यूज जो छपी थी उसे सैद्धांतिक तौर पर पेडन्यूज ही माना जाता है और इसे प्रमाणित करने के लिए पैसों के लेनदेन का सबूत पेश करना अनिवार्य नहीं है। चुनाव आयोग ने शीर्ष अदालत से आग्रह किया है कि वह दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाए। यदि सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी तो नरोत्तम मिश्रा 2018 का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
दिल्ली हाई कोर्ट के एक फैसले को शीर्ष न्यायालय में चुनौती देते हुए आयोग ने उपरोक्त आग्रह किया। निर्वाचन आयोग ने पेड न्यूज के आरोप में मध्य प्रदेश के मंत्री नरोत्तम मिश्रा को चुनाव लड़ने से तीन वर्षों के लिए अयोग्य ठहरा दिया था। दिल्ली हाई कोर्ट ने आयोग के इस आदेश को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है।
आयोग ने शीर्ष अदालत से आग्रह किया कि वह नेताओं का स्तुति गान करने वाले लेखों से जुड़े मुद्दे का गहराई से परीक्षण करे, क्योंकि इस तरह के मामले चुनावों के दौरान अक्सर सामने आते हैं। आयोग ने कहा कि ऐसे लेख या समाचार जिनमें प्रत्याशी ने अपनी उपलब्धियों का विवरण देते हुए वोट की अपील की है, पेड न्यूज ही माना जाता है। इसके लिए यह प्रमाणित करना जरूरी नहीं है कि पत्रकार और प्रत्याशी के बीच रुपयों का लेनदेन हुआ है और हुआ है तो वो रकम कितनी है। अपनी अपील में चुनाव आयोग ने शीर्ष अदालत से आग्रह किया है कि वह दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाए।
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