भोपाल। भाजपा में नेहरू की तारीफ प्रतिबंधित है। तारीफ करने वालों को दंडित किया जाता है। गालियां देने वालों को बड़े पद मिलते हैं। इतना ही नहीं मध्यप्रदेश में तो एक आईएएस अफसर अजय गंगवार को सिर्फ इसलिए कलेक्टरी से हाथ धोना पड़ा था क्योंंकि उसने सोशल मीडिया पर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा किए गए कुछ अच्छे काम गिना दिए थे। वो उस समय बड़वानी कलेक्टर थे। उन्हे मंत्रालय में बुलाकर बाबूगिरी करवाई गर्इ् थी। आज भारत के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पंडित जवाहरलाल नेहरू की तारीफ कर दी है। उन्होंने बड़ी मासूमियत से कह डाला कि पंडित नेहरू ने 35 साल के अटल में भावी प्रधानमंत्री देख लिया था।
अटलजी के खिलाफ हो गए थे आडवाणी
बता दें कि जिस अटल में पीएम जवाहरलाल नेहरू ने भारत का भावी प्रधानमंत्री देख लिए था, उसी अटल बिहारी को भाजपा में किनारे करने की काफी कोशिशें भी हुईं। 1992 में जब देश में राममंदिर मुद्दा पूरे खुमार पर था। सारा देश आंदोलित था और लालकृष्ण आडवाणी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, तब अटल बिहारी वाजपेयी को पूरी तरह से किनारे कर दिया गया था। देश भर में आडवाणी का रथ दौड़ रहा था। उन दिनों कुछ अखबारों में खबरें भी छपीं कि अटलजी भाजपा छोड़ने का मन बना रहे हैं।
भाजपा ने कब और क्यों बनाया अटलजी को पीएम कैंडिडेट
बाबरी मस्जिद प्रकरण के बाद भाजपा को घाटा हुआ और उत्तर प्रदेश के चुनावों में उसके विधायकों की संख्या घट गई। विधानसभा चुनावों में ख़राब प्रदर्शन के बाद आडवाणी के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे। दो साल बाद हवाला कांड में जब आडवाणी का नाम आया तो बदलाव की आहट बढ़ने लगी लेकिन आरएसएस के तब के सरसंघचालक राजेंद्र सिंह के कहने के बाद आडवाणी ने खुद इस बात का ऐलान किया कि वो अगले लोकसभा चुनावों में खड़े नहीं होंगे, उनकी जगह वाजपेयी चुनावी मैदान में होंगे। भाजपा को गिरने से बचाने के लिए वाजपेयी को सामने लाया गया। जनता में उनकी लोकप्रियता के कारण उन्हे पीएम कैंडिडेट बनाया गया। इसके बाद वाजपेयी के नेतृत्व में 1996, 1998 और 1999 में एनडीए की सरकार बनी और वो प्रधानमंत्री।
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