लखनऊ। यह बड़ा सवाल सारे देश में गूंज रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हो गया है। अटलजी एक ऐसे नेता थे जिन्हे देश के सभी वर्ग प्यार करते थे। पीएम नरेंद्र मोदी सरकार ने भारत में 7 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। राज्य सरकारों ने भी राजकीय शोक घोषित किया है। इसी बीच में ईद का त्यौहार आ रहा है। सवाल यह है कि क्या राष्ट्रीय शोक के समय त्यौहार मनाया जाना चाहिए।
इस्लामिक सेंटर ऑफ इण्डिया के अध्यक्ष और ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने इस सवाल पर कहा कि बकरीद मनाये जाने से, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद घोषित सात दिन के राष्ट्रीय शोक पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि इस त्यौहार का मिजाज जश्न से कहीं ज्यादा कुर्बानी के जज्बे का है।
उन्होंने कहा कि ईद-उल-अजहा पूरे देश में 22 अगस्त को मनाया जाएगा। उस दिन मुस्लिम लोग नमाज अदा करने के बाद अल्लाह के हुजूर में कुर्बानी करके अपने अंदर त्याग का जज्बा पैदा करते हैं, ताकि जब भी कौम और मुल्क को किसी तरह की कुर्बानी की जरूरत पड़े तो उसे पेश करने के लिये इंसान तैयार रहे। इस त्यौहार का मिजाज जश्न से कहीं ज्यादा कुर्बानी के जज्बे का है।
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