भोपाल। आज दिनांक 16/08/2018 को मान सर्वोच्च न्यायालय की 5 जजों की संविधान पीठ ने पदोन्नति में आरक्षण को लेकर वर्ष 2006 में दिए निर्णय में अनु. जाति/ जनजाति में लागू पिछड़ेपन की शर्त पर पुनर्विचार के लिए निर्णय हेतु पुन: सुनवाई की।
बहस की शुरुआत सरकार की ओर से श्री वेणुगोपाल द्वारा की जाकर जोर दिया गया कि अनु. जाति/जनजाति घोषित पिछड़े है और उनमें क्रीमी लेयर की अवधारणा लागू नहीं की का सकती। इस वर्ग के जो समूह आर्थिक और शैक्षणिक रूप से ऊपर उठ गए हैं उन्हें सिर्फ संसद ही हटा सकती है, किसी अन्य को यह अधिकार नहीं है। प्रकरण पर श्री वेणुगोपाल के अतिरिक्त श्री पत्वलिया ने भी यही तर्क रखा साथ ही यह भी कहा कि प्रतिनिधित्व के मान से इन्हें पिछड़ेपन से अलग नहीं माना जा सकता।
अभी भी सरकार व अन्य की ओर से कई वकीलों को तर्क रखना है कोर्ट ने 1 घंटे में बात समाप्त करने का निर्देश दिया है एवं सुनवाई हेतु 22 अगस्त निश्चित की। 2 अगस्त को संभवत: लंच के बाद प्रमोशन में आरक्षण का विरोध करने वाले वकीलों को अपनी बात कहने का मौका मिलेगा।
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