भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री, कवि, पत्रकार व कुशल राजनेता अटल बिहारी बाजपेयी को सम्पूर्ण जिले में दी गयी भाव भीनी श्रद्धांजलि

वी.के. त्रिवेदी, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT; ​पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के निधन से सम्पूर्ण लखीमपुर खीरी जनपद में भी शोक की लहर फैल गयी है, चाहे वो बीजेपी से जुड़ा कार्यकर्ता हो या फिर आम जन, अटल जी के निधन से जिले वासी दुखी हैं। आज अटल बिहारी बाजपेयी को श्रद्धांजलि देने के लिए बीजेपी कार्यालय पर नेताओं के साथ आमजनों ने अटल बिहारी बाजपेयी जी की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित की।

खीरी से रहा है अटल जी का पुराना नाता, हर आंख है नम

 पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जिले से ‘अटल’ नाता रहा है। तराई से अटल जी की रिश्तेदारी तो थी ही हर बीजेपी कार्यकर्ता और आमजन के दिल में भी अटल जी बसते थे।​छोटी काशी के नाम से मशहूर गोला गोकर्णनाथ में अटल बिहारी वाजपेयी की सगी भांजी मंजू मिश्रा का ससुराल था।

 पति प्रमोद मिश्रा बजाज हिंदुस्थान चीनी मिल में कार्यरत थे। अटल जी की सादगी यही थी कि अपनी भांजी से मिलने वो गोला आया करते थे। मंजू तो अब नहीं रहीं पर उनके पति आज भी गोला में रहते हैं। ​यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे बीजेपी के वरिष्ठ नेता रामकुमार वर्मा याद करते हुए बताते हैं कि जब वो कक्षा सात के विद्यार्थी थे तो गोला में अटल जी भांजी मंजू के घर आए थे। हम छोटे थे अटल जी को छिप-छिप कर देखते थे। एक दिन उन्होंने मुझे बुलाया और अपनी गोद में बिठाया, नाम पता पूछा, उस समय से शाखा में जाने का सिलसिला शुरू हुआ। रामकुमार उस पल को याद कर भावुक हो जाते हैं। थोड़ी देर बाद सम्भल कर कहते हैं कि उनके जैसा विराट व्यक्तित्व का स्वामी न हुआ था न होगा। आंसुओं को पोंछते हुए कहते हैं कि हमारा अभिभावक चला गया।

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अटल बिहारी वाजपेयी विलोबी हाल के प्रांगण में भी कई बार आए। उनके भाषण को सुनने लोग 100-100 किलोमीटर से आते थे। अवधी कविता के कवि फारुख सरल कहते हैं। मुझे याद है गन्ना संस्थान में अटल जी एक कार्यक्रम में आए थे। हमारी कविता सुन बुलाया। कंधे पर हाथ रखा। रामकुमार वर्मा से बोले तुम्हारे जिले के हैं न फारुख इनको साथ रखो। ​बीजेपी के जिलाध्यक्ष शरद वाजपेयी अटल जी से जुड़े अपने संस्मरण सुनाते हुए कहते हैं,1977 में जनता पार्टी से विदेश मंत्री रहे अटल जी मेरे घर संकटा देवी मोहल्ले में आए थे। पिता जी उस वक्त जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष थे। खाना खाकर बाहर निकल आए पर गार्ड और स्टाफ के लोग खाना खा रहे थे। अटल जी पिता जयशंकर वाजपेयी के साथ जमीन पर ही धक्क से बैठ गए। 

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1980 में अटल जी हफ्ते भर लखीमपुर रुके थे। डॉ जयशंकर वाजपेयी उस वक्त चुनाव लड़ रहे थे। स्टार कैम्पेनर जनता पार्टी से अटल जी थे। एक दिन सुबह सुबह ही तैयार हो अटल जी घर आ पहुंचे। पूछा तो पिता जी अभी सो रहे थे। बोले कह दो डॉक्टर साहब से अब डॉक्टर नहीं नेता बनने जा रहे हैं, समय का ध्यान रखें। ऐसे न जाने कितने किस्से शरद वाजपेयी सुनाते चले जाते। 

अटल जी की सादगी थी कि अपनी भांजी के घर भी जाते थे तो मामा के रूप में न प्रधानमंत्री के रूप में न नेता के रूप में। अटल जी को उनकी पार्टी के लोग ही याद नहीं करते हैं । यूपी सरकार में वन मंत्री रह चुके और खीरी के कांग्रेस सांसद जफर अली नकवी याद करते हुए कहते हैं। सन याद नहीं पर गुड़ मण्डी में अटल जी आए थे। हमें भी पता चला तो भाषण सुनने हम भी पहुंच गए। 

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उनकी आवाज में जो खनक थी एक-एक शब्द वजनदार था। इसीलिए अपोजिशन में रहते हुए भी कांग्रेस सरकार ने उनको विदेश में देश की तरफ से भेजा था। आज एक हरदिल अज़ीज नेता देश ने खो दिया। 

कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह कहते हैं कि अटल जी के जाने से राजनीति की मर्यादा का युगपुरुष आज हिन्दोस्तां से विदा हो गया। 

विपक्ष की धार का अटल जी ने जैसा उदाहरण पेश किया वो हिंदुस्तान के इतिहास में अब न मिलेगा। अपनी पार्टी के साथ सबको साथ लेकर चलने की उनकी विलक्षण प्रतिभा ही उनको सबसे अलग बनाती थी। सियासत के एक युग का अंत है अटल जी के साथ हो गया।



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