अशफाक कायमखानी, जयपुर, NIT;
तीन महीने बाद मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के साथ राजस्थान विधानसभा सभा के होने वाले आम चुनावों का प्रदेश की जनता व सियासी दलों के कार्यकर्ताओं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा अध्यक्ष अमीत शाह के बाद कल कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गाधी जैसे शिर्ष नेताओं के राजस्थान में विभिन्न कार्यक्रमों मे आने के बाद चुनावी रंग परवान चढने लगा है।
भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने चालाकी के तहत प्रदेश भर से राज्य व केंद्र की योजनाओं के लाभार्थियों को सरकारी धन खर्च पर जयपुर में बडी तादाद में जमा करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 7-जुलाई को उनसे जनसवांद करने के बहाने अपनी सरकार की उपलब्धियों के साथ साथ केंद्र सरकार के कामों का प्रधानमंत्री के मुख से प्रचार करके एक तरह से चुनावी शंखनाद करवा कर स्वयं 4-अगस्त को चारभुजा मंदिर के दर्शन करने के बाद अब प्रदेश में गौरव यात्रा के बहाने प्रदेश के हर जिले में रथ लेकर यात्रा करने के बहाने चुनावी तापमान बढाने निकल पड़ी हैं। इसके विपरीत संगठन तौर पर कमजोर व नेताओं के आपसी तीखे शब्दबाणों के चलने के मध्य राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने 11-अगस्त को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को जयपुर बूलाकर कांग्रेस प्रतिनिधि सम्मेलन करके अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने की भरपूर कोशिश की है। जयपुर हवाई हड्डे से लेकर कांग्रेस प्रतिनिधि सम्मेलन स्थल रामलीला मैदान तक पायलट ने राहुल गांधी का रोड़शो करवाते हुये अपने विश्वासी कांग्रेस जनों से जगह जगह भव्य स्वागत करवाते हुये अपने जनाधार का खुले तौर पर प्रदर्शन किया है। हालांकि इस तरह के राहुल गांधी के रोड़शो में स्वागत के कार्यक्रम में सचिन पायलट के पूर्व में चुनावी क्षेत्र रहे दौसा व मौजूदा चुनावी क्षेत्र अजमेर से आये उनकी बिरादरी के गूर्जर लोगों ने पूरी तरह मोर्चा सम्भाल रखा था। गूर्जर समुदाय के अलावा पायलेट के खासमखास एवं भाजपा यूवा मोर्चा के साबिक प्रदेश अध्यक्ष व अब जयपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रताप सिंह खाचरियावास एवं विश्व हिन्दू परिषद के शोले ब्यानी करने वाले शिखर नेता आचार्य धर्मेंद्र की पूत्रवधु कांग्रेस प्रवक्ता अर्चना शर्मा के खास समर्थकों ने भी राहुल गांधी के रोड़शो को सफल बनाने के लिये कड़ी मेहनत के साथ मोर्चे पर डटे हुये थे। राहुल गांधी के इस जयपुर दौरे में कांग्रेस के संगठन महामंत्री अशोक गहलोत व प्रभारी महामंत्री अविनाश पांडे उनके साथ बस में व मंच पर राहुल गांधी के साथ नजर जरुर आये लेकिन प्रमुख भूमिका में अतिथि राहुल गाधी के अलावा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ही पूरे कार्यक्रम में दिखाई दिये। राहुल गांधी ने अपने जयपुर कार्यक्रम के अंतिम चरण में जयपुर के गोविंद देवजी मंदिर के कांग्रेस नेताओं के साथ दर्शन करके प्रदेश में गुजरात की तरह चुनावी शंखनाद किया।
11 अगस्त को जयपुर में राहुल गांधी के आने से पहले 7 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, 21 जुलाई को भाजपा अध्यक्ष अमीत शाह ने भी जयपुर आकर विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेकर चुनाव शंखनाद किया है। इसी के साथ ही मुख्यमंत्री राजे 4 अगस्त से प्रदेश में अपनी गौरव यात्रा को शूरुवात करके चुनावी माहोल बनाते हुये अपनी सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचा कर सियासी लाभ पाने में प्रयासरत हैं। सभी कार्यक्रमों में उक्त नेता अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुये एक दूसरे दल के नेताओं व उनकी सरकार के कार्यकाल पर जमकर हमले शब्दबाणों के मार्फत बोलते आ रहे हैं।
कुल मिलाकर यह है कि भाजपा की तरह कांग्रेस भी अब सोफ्ट हिन्दुत्व के मुद्दे को अपनाते हुये सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने की भरसक कोशिश यूपी, गुजरात व कर्नाटक के बाद अब राजस्थान में भी करती नजर आ रही है। इसके अलावा मुख्यमंत्री राजे की चारभुजा मंदिर के दर्शन के बाद यात्रा पर निकलने की तरह भाजपा नेता कार्यक्रम की शूरुआत में मंदिर दर्शन करते हैं, जबकि राहुल गांधी के कार्यक्रम के अंतिम चरण में गोविंद देव मंदिर दर्शन करने की तरह कांग्रेस नेता कार्यक्रम के अंतिम चरण में मंदिर दर्शन करके जनता को अपने हिसाब से संदेश देते हैं। राहुल गांधी के जयपुर के 11-जुलाई के दौरे में खास बात यह भी नजर आई की पूर्व में अशोक गहलोत द्वारा आयोजित व प्रायोजित कार्यक्रम को सफल बनाने के लिये परम्परागत भाजपा वोटबैंक माली मतदाता होने के बावजूद कार्यक्रम को सफल करने मेंपूरी ताकत लगा देता था। उसी तरह परम्परागत भाजपा का गूज्जर मतदाता ने सचिन पायलट द्वारा आयोजित राहुल गांधी के जयपुर कार्यक्रम को सफल बनाकर पायलट का सियासी रुतबा बढा दिया है। दूसरी तरफ राजस्थान में बेगुनाह मुस्लिम गोपालकों की लगातार हो रही हत्याओ पर राहुल गांधी एक शब्द भी अपने जयपुर दौरे में नहीं बोले।
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