GWALIOR: अभी तक आपने माता पिता की नाराज होकर अपने घर से मासूमों के भाग जाने की कहानी सुनी होंगी। परंतु आज तो एक मासूम ने अपने स्कूल में टेस्ट से बचने के लिए अपने ही अपहरण की झूठी कहानी गढ़ दी। इस मामले में खनियांधाना पुलिस बुरी तरह से चकिरघिन्नी हो गई। यह घटना घटित हुई जिले के खनियांधाना थाना क्षेत्र में जहां कस्बे में स्थित छात्रावास से कल कक्षा 7वीं का एक छात्र बाउण्ड्री फलांग कर वहां से भाग गया और जब उसे पुलिस ने पकड़ लिया तो उसने अपने अपहरण की झूठी कहानी रच दी। बाद में पुलिस ने छात्र से अलग से पूछताछ की तो उसने पुलिस को बताया कि आज उसका टेस्ट होना था जिससे बचने के लिए वह हॉस्टल से भागा था। हालांकि इस दौरान पुलिस और हॉस्टल प्रबंधन बालक के अपहरण की कहानी सुनकर चकरघिन्नी हो गई थी, लेकिन शाम होते-होते यह स्पष्ट हो गया कि बालक का अपहरण नहीं हुआ था तब कहीं जाकर पुलिस ने राहत की सांस ली।
जानकारी के अनुसार आरोन निवासी अशोक जैन ने अपने 12 वर्षीय पुत्र अभिनव जैन को दो माह पूर्व खनियांधाना में पिछोर रोड पर स्थित श्रमण संस्कृति संस्थान छात्रावास में भर्ती किया था जहां रहकर अभिनव कक्षा 7वीं की पढ़ाई करता था और आज सोमवार को उसका मंथली टेस्ट होना था। जिससे बचने के लिए अभिनव छात्रावास की बाउण्ड्री फलांग कर भाग गया और वह एक मंदिर पर जाकर बैठ गया। इस दौरान छात्रावास से अभिनव के गायब होने से छात्रावास प्रबंधन सकते में आ गया और पुलिस को सूचना दी गई। जब पुलिस ने बालक की तलाश शुरू की तो पिछोर रोड पर बैठा मिला।
जब पुलिस ने उससे पूछताछ की तो उसने पुलिस को बताया कि उसे बाइक पर सवार दो लोगों ने कुछ सुंघाकर बेहोश कर दिया था और वह उसे मंदिर से उठाकर ले गए थे, लेकिन बाद में जब उसे होश आया तो वह बाइक से कूद गया और भागते हुए यहां आ गया है। पुलिस ने जब बालक की कहानी सुनी तो इस पर उन्हें यकीन नहीं हुआ और बालक से खनियांधाना टीआई राकेश शर्मा ने अलग से पूछताछ की और उसे विश्वास दिलाया कि कोई भी उसे डांटेंगे नहीं, इसलिए वह सही बात बता दे।
श्री शर्मा की बातें सुनकर अभिनव ने सारा हाल उन्हें सुना दिया और बताया कि वह छात्रावास में रहना नहीं चाहता है, क्योंकि उसका पढ़ाई में मन ही नहीं लगता है। बालक द्वारा सच्चाई बताई जाने के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली और उसके बयान दर्ज कराने के लिए सीडब्ल्यूसी शिवपुरी भेज दिया।
पूर्व में भी हॉस्टल से चला गया था अभिनव
विद्यालय के प्राचार्य संतोष अग्रवाल ने बताया कि अभिनव दो माह पूर्व ही संस्था में आया था, लेकिन उसका पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था जिस कारण वह एक माह पूर्व अपने घर वापस चला गया था उस समय उसके माता-पिता उसे लेकर पुन: उनके पास आए थे जहां उन्होंने लिखित में उनसे अनुरोध कर अभिनव को दाखिला दिलवाया था, लेकिन तब भी अभिनव पढ़ाई नहीं करता था और उसने पढ़ाई से बचने के लिए यह झूठी कहानी रच दी।
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