जिस Phd को भाषा का ज्ञान ना हो, वो बच्चों का क्या शिक्षा देगा: पवैया | mp news

भोपाल। विश्वविद्यालय नया शोध नहीं दे पा रहे हैं तो उन्हें परीक्षा कराने वाली फैक्ट्री बने रहना ठीक नहीं है। वहां जो शिक्षक हैं और जिन्होंने डाॅक्टरेट ली हुई है, उन्हें भी सोचना होगा कि हमने दुनिया को क्या नया दिया। क्योंकि, डॉक्टर बड़ा शब्द होता है, जो हम लिखते हैं। यह बात उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया ने सोमवार को इंस्टीट्यूट फॉर एक्सीलेंस इन हायर एजुकेशन कैंपस बने बालक छात्रावास के शुभारंभ मौके पर कही। उन्होंने कहा कि पीएचडी के बारे में बहुत धारणाएं चलती हैं। कई धारणाएं ऐसी हैं कि जेब में पैसा है तो किराए पर पीएचडी ले सकते हैं। हालांकि यह बीते जमाने की बात है। अभी तो कोई शिकायत मेरे पास नहीं आई है। लोग धनी है तो डॉक्टर लिख सकते हैं। पर जिन डॉक्टर साहब को हिंदी में लिखना ही सही से नहीं आता है तो ऐसे में वे बच्चों को क्या शिक्षा देंगे? 

पवैया ने कहा कि हमने सेमेस्टर सिस्टम खत्म किया। कई ऑटोनॉमस कॉलेज उनके यहां इस सिस्टम को लागू करने की मांग रहे हैं। लेकिन, मैं इससे सहमत नहीं हूं। क्योंकि, स्टूडेंट्स को परीक्षा से परीक्षा तक के जाल में उलझाए रखने से उनका पर्सनालिटी डेवलपमेंट नहीं हो पाता। स्टूडेंट कुंठा से ग्रस्त जीवन जीता है। हर समय रिजल्ट और आने वाली परीक्षा का इंतजार। इसलिए हमने एनुअल सिस्टम को लागू किया। पवैया ने दीक्षांत समारोह की यूनिफार्म को बदलकर भारतीय वेशभूषा लागू करने के निर्णय को आजादी के बाद का बड़ा निर्णय बताते हुए कहा कि गाउन और टोपी पहनने की विदेशों और कैथोलिक के चर्चों से चली हुई परंपरा को मैं नहीं ओढ़ सकता था। इस दौरान इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. एमएल नाथ भी मौजूद रहे। पवैया ने बालक छात्रावास के साथ कंप्यूटर लैब का भी शुभारंभ किया। 

मोबाइल एटम बम और सोशल साइट्स हैं अनसोशल 
पवैया ने कहा कि लोग एकांगी जिंदगी जी रहे हैं। यह छात्रावास साथ-साथ जीना सीखते हैं। उन्होंने का कहा सोशल साइट्स एक नया बवाल हैं। उन्होंने इसे अनसोशल साइट्स का नाम दिया। वहीं मोबाइल एटम बम बताया। लेकिन,जिस तरह एटम के बारे में कहा जाता कि यह दुनिया का नाश भी कर सकती है और यह एटम एनर्जी दुनिया का कल्याण करने में भी सार्थक है। इसलिए हमारे हाथ में रहने वाला मोबाइल एटम की तरह होता है। उन्होंने मोबाइल संभाल कर रखने की सलाह दी। 
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