जब भी शिवलिंग के अभिषेक की बात आती है तो हर किसी के मन में 2 सबसे सरल विधान प्रकट हो जाते हैं। पहला जल से अभिषेक और दूसरा दूध से अभिषेक। कुछ अज्ञानी फिल्म निर्माताओं ने एक फिल्म में कुछ कुतर्क कह डाले तो लोग अब दूध से अभिषेक करने के बजाए उसे बच्चों को दे देते हैं लेकिन ज्योतिष कहती है कि शिवलिंग के अभिषेक से चमत्कारी लाभ होते हैं। बस अपनी राशि के अनुसार उपाय किए जाने चाहिए। आइम हम बताते हैं कि ना केवल श्रावण मास बल्कि चातुर्मास में आप शिवलिंग पर क्या अर्पित करें कि आपको शिवकृपा प्राप्त हो और और आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाएं।
राशि के आधार पर उपाय
मेष - भगवान शिव का शहद और गन्ने का रस से अभिषेक करें।
वृष - कच्चे दूध और दही से अभिषेक करें।
मिथुन - फलों के रस से शिव जी का अभिषेक करें। इसके बाद भगवान को लाल फूल अर्पित करें।
कर्क - कच्चे दूध और मक्खन से शिव का अभिषेक करें।
सिहं - शहद और गुड़ से शिवजी का अभिषेक करें।
कन्या - गंगाजल या किसी पवित्र नही के जल से शिवजी का अभिषेक करें।
तुला - धतुरा, दूध, दही और गन्ने के रस से अभिषेक करें।
वृश्चिक - शहद से अभिषेक करने के बाद शिव को लाल फूल चढाएं।
धनु - देशी घी और पीले फूल के साथ लाल चंदन से शिवजी का अभिषेक करें।
मकर - तिल और सरसों के तेल से शिव का अभिषेक करें।
कुंभ - कच्चा दूध और दही से अभिषेक करें। इसके बाद नीले पुष्प चढ़ाएं।
मीन - गन्ने का रस और शहद में बादाम मिलाकर शिवजी का अभिषेक करें। इसके बाद पीले फल अर्पित करें।
अभिषेक के बाद सभी राशि के लोगों को भगवान शिव को बिल्वपत्र चढ़ाना चाहिए।
शिव जी को क्यों प्रिय है सावन का महीना
मान्यताओं के अनुसार माता सती ने अपने जीवन को त्याग कर कई वर्षों तक श्रापित जीवन जीया। उसके बाद उनका जन्म हिमालय राज के घर माता पार्वती के रूप में हुआ। माता पार्वती ने शिवजी को पति रूप में पाने के लिए सावन महीने में कठोर तपस्या की थी इससे खुश होकर शिवजी ने उनकी मनोकामना पूरी की। माता सती को पार्वती जी के रूप में फिर से पाकर भगवान शिव प्रशन्न हुए। तभी से श्रावण का यह महीना प्रिय माना जाता है।
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