ग्वालियर: ग्वालियर में 6 साल की मासूम के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दोषी जितेंद्र कुशवाह को फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट में रोजाना केस की गवाही चली इस दौरान आरोपित की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंस से कराई गई थी। मासूम के साथ दुष्कर्म व हत्या के मामले में विशेष सत्र न्यायालय में मंगलवार को अंतिम बहस पूरी हो गई थी। इस बहस के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया था कि सीसीटीवी फुटेज में युवक का चेहरा साफ नहीं दिख रहा है। जिन लोगों ने युवक को देखा, उनसे पहचान नहीं कराई है। पुलिस ने गलत व्यक्ति को पकड़ लिया है। अभियोजन की ओर से कहा गया कि अगर गलत व्यक्ति को पुलिस पकड़ती तो मासूम के खून के धब्बे आरोपित के कपड़ों पर नहीं होते। आरोपित ने मासूम से दुष्कर्म किया है, उसके साक्ष्य भी बच्ची के शरीर से मिले हैं। इस बात की डीएनए रिपोर्ट में भी पुष्टि हो चुकी है। शुक्रवार को कोर्ट ने 13 दिन के ट्रायल के बाद सजा सुनाई है। एहतियात के तौर पर आरोपी की वीडियो कांन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई की गई। कोर्ट ने इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस माना है। दोषी पर 37 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है।
जानकारी के अनुसार 20-21 जून की दरमियानी रात आमखो पर आयोजित शादी समारोह में खेल रही छह साल की मासूम गायब हो गई थी। अगले दिन 21 जून को कैंसर पहाड़ियों के जंगल में मासूम का शव मिला था। पीएम रिपोर्ट में मासूम के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। इसके बाद सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जीतू उर्फ जितेन्द्र कुशवाह निवासी आमखो पहाड़िया को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
सुनवाई के दौरान पुलिस ने रोजाना कोर्ट में गवाहों को उपस्थित कराया, जिसके चलते 13 दिन में ही सुनवाई पूरी हो गई। केस की सुनवाई के दौरान 33 गवाहों की गवाही कराई गई। इसके बाद केस में अंतिम बहस भी पूरी हो गई। आरोपित ने बचाव में जो भी तर्क दिए, उन सभी तर्कों का विरोध करते हुए अतिरिक्त जिला अभियोजन अधिकारी अनिल मिश्रा व अधिवक्ता सोमवीर सिंह यादव ने साक्ष्य पेश किए। साथ ही डीएनए रिपोर्ट की जानकारी कोर्ट को दी थी।
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