
नीम का उपयोग विषम ज्वर में भी किया जाता है। इसके पानी का उपयोग एनिमा व स्पंज बाथ में किया जाता है। बुखार में एक काढ़ा तैयार किया जाता है। ज्वर उतारने के लिए नीम के इस काढ़े को आयुर्वेदाचार्यों ने अमृत कहा है। काढ़ा तैयार करने के लिए 250 ग्राम पानी, तुलसी के दस पत्ते, काली मिर्च के दस पत्ते, नीबू एक-एक टुकड़ा, अदरक, नीम के पांच पत्तियां प्रयोग में लायी जाती हैं। सबसे पहले काली मिर्च व अदरक को पीसकर 250 ग्राम पानी में डालकर अच्छी तरह उबाला जाता है। पानी आधा रहने पर उसको छान कर उस काढ़े को पीकर सो जाते हैं, जिससे शरीर में पसीना निकलता है। इससे बुखार, खांसी व सिरदर्द में लाभ होता है। महिलाओं के श्वेत प्रदर रोग में भी नीम लाभकारी है। इस रोग में नीम व बबूल की छाल का काढ़ा तैयार करके श्वेत प्रदर में उपयोग करने से अच्छा लाभ मिलता है। खुजली में नीम की गिरी नित्य खाते रहने से तथा नीम की कोमल पत्तियां खाने से आराम मिलता है। नीम की सूखी पत्तियां, कपड़ों व अनाज में रखने से वे खराब नहीं होते। नीम का वृक्ष आक्सीजन भी अधिक देता है।
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